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मानव शरीर के बारे में बत्तीस रोचक तथ्य

मानव शरीर के बारे में बत्तीस रोचक तथ्य जो जानकर आपको अचम्भा होगा


1- मानव शरीर में जीव्हा सबसे शक्तिशाली मांसपेशी (Muscle) होती है.
2- हमारी आंतों में 3 ट्रिलियन (3 लाख करोड़) बैक्टिरिया होते हैं।
3- सांयकाल की तुलना में आप प्रात:काल अधिक लंबे होते हैं।
4- आपका पेट हर तीन दिन में एक परत बनाता है, खुद को पचाने से बचाने के लिए।
5- आधे घंटे में मानव शरीर इतनी गर्मी पैदा करता है कि उससे एक गैलन पानी गर्म हो जाएगा।
6- आंख अकेला ऐसा मल्टीफोकस लेंस है जो केवल दो मिली सकेंड में एडजस्ट हो जाता है।
7- जिस हाथ से आप लिखते हैं, उस हाथ के नाखून अधिक तेजी से बढ़ते हैं।
8- एक नवजात शिशु एक मिनट में 60 बार सांस लेता है। जबकि एक किशोर 20 बार और एक युवा 16 बार।
9- मनुष्य के जांघों की हड्डियां, कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होती है।
10- खाए गए भोजन को पचने में लगभग 12 घंटे लगते हैं।
11- 18 साल के बाद आपका दिमाग बढ़ना बंद कर देता है।
12- मानव खाए बिना कई हफ्ते गुजार सकता है, लेकिन सोए बिना केवल 11 दिन।
13- आदमी के शरीर में 60,000 किमी लंबीरक्त वाहिकाएं हैं।
14- एक आदमी के पूरे जीवन के दौरान 22 किलोग्राम डेड स्किन निकलती है।
15- किस करने से अधिक, हाथ मिलाते हुए जीवाणुओं का आदान-प्रदान होता है।
16- आपका दिल दिन में लगभग 1,00,000 बार धड़कता है।
17- एक भ्रूण केवल तीन महीने के अंदर अपने फिंगरप्रिंट प्राप्त कर लेता है।
18- लड़कों में लड़कियों के मुकाबले मुंहासे होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
19- मनाव भ्रूण संगीत सुनने के दौरान ज्यादा प्रतिक्रिया करता है।
20- एक स्वस्थ दिमाग 20 वाट तक बिजली पैदा कर सकता है।
21- दांतों में पाया जाने वाला अनेमल, शरीर का सबसे शक्तिशाली पदार्थ है।
22- हमारे कान 50,000 हर्ट्स तक की फ्रीक्वेंसी सुन सकते हैं।
23- फिंगरप्रिंट की तरह हर इंसान की अपनी टंगप्रिंट होती है।
24- एक दिन में किडनी आपके खून के 300 लीटर फिल्टर करती है।
25- मस्तिष्क के पॉवर सर्कल्स का सम्बन्ध हाथ पैर की उँगलियों से भी होता है।
26- मानव शरीर में 30,00,000 करोड़ लाल रक्त कणिकाएं होती हैं।
27- त्वचा में कुल 72 किलोमीटर नर्व होती है।
28- इंसान एक साल में औसतन 62,05,000 बार पलकें झपकाता है।
29- जब आप शर्माते हैं तो आपके गालों के साथ आपके पेट की परतें भी सिकुड़ जाती हैं।
30- सबकी अपनी एक यूनिक गंध होती है।
31- मानव मस्तिष्क एक मिनट में हजार शब्द पढ़ सकता है।
32- मनुष्य अपने पूरे जीवनकाल में अपनी उंगुलियां 2.5 करोड़ बार मोड़ता व सीधी करता है।

कलौंजी के कुछ उत्तम गुण

कलौंजी एक कालजयी औषधि है, जानिये इसके कुछ उत्तम गुण



कलौंजी को एक बहुत विशेष गुण वाली औषधि माना गया है और आप लोग इसके बारे में बहुत कुछ सुनते और जानते रहते हैं । इस पोस्ट के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम कलौंजी के कुछ ऐसे गुणों से आपको परिचित करवायें जो अक्सर सभी को लाभ पहुँचाते है । आइये जानते हैं इन गुणों के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से ।
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1. कलौंजी और जीरा को पीसकर लेप बनाकर मस्तक पर लगाने से सर्दी से होने वाले सिरदर्द मे लाभ होता है |
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2. गुर्दे और मूत्राशय की पथरी को गलाने के लिये कलौंजी को पीसकर शहद के साथ मिलाकर रोज दो बार पिया जाता है ।
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3. अनचाहे मस्सो को हटाने के लिये कलौंजी को सिरके मे मिलाकर लगाने से मस्से कट जाते है ।
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4. बवासीर के मस्सों को ठीक करने के लिये कलौंजी को जलाकर मस्सो के स्थान पर लगाने से मस्से ठीक हो जाते है ।
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5. 1 ग्राम चूर्ण कलौंजी के साथ शहद मे मिलाकर दिन मे कई बार चाटने से बुखार मे फायदा होता है ।
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6. जुकाम होने पर या नाक से पानी आने पर कलौंजी के चूर्ण मे जैतून का तेल मिलाकर नाक मे चार बूंद टपकाने से लाभ होता है ।
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7. सिर पर कलौंजी कै तेल की मालिश करने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है ।
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कलौंजी के बारे में यह जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर कीजियेगा ।

घुटने घिस गए है - बबूल और हरसिँगार का यह प्रयोग आजमा कर देख लें



घुटने घिस जाने के कारण बदलवाने की नौबत आ गयी है तो पहले एक बार बबूल और हरसिँगार का यह प्रयोग आजमा कर देख लें
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उम्र बढ़ने के साथ साथ घुटनों का घिस जाना बुजुर्ग लोगों के सबसे बड़ी पीड़ा की दशा बन जाती है और एक समय के बाद डॉक्टर बोल देते हैं कि घुटने बदलवा लो । इस अवस्था से आपके भी परिचय में कोई व्यक्ति हों तो उनको एक बार यह प्रयोग जरूर आजमाने के लिये बोलें, बहुत उम्मीद है कि बिना घुटने बदलवाये ही उनको काफी आराम आ जायेगा । जानिये इस प्रयोग के बारे में ।
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बबूल अथवा कीकर के पेड़ से आप सब भली भाँति परिचित होंगे ही । हमको बस इस बबूल के पेड़ की फलियॉ चाहियें । बबूल के पेड़ की फलियों को तोड़ कर उनको बीजों के साथ ही धूप में पूरी तरह सुखा लें और इमामदस्ते में दरदरा कूटकर, मिक्सी में चला कर उसका बारीक चूर्ण तैयार कर लें । आपकी पहली दवा तैयार है । इसको काँच की साफ और एयर टाईट शीशी में भरकर रख लो ।
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दूसरी चीज आपको चाहिये हरसिँगार के पेड़ के पत्ते । हरसिँगार के पेड़ के पत्तों का काढ़ा आपको रोज सेवन करने से पहले ताजा तैयार करना पड़ेगा । काढ़ा तैयार करना बहुत आसान है और इसकी विधी हम आपको बता रहे हैं । काढ़ा तैयार करने के लिये हर्सिँगार के दस पत्ते लेकर उनको 200 मिलीलीटर पानी के साथ साफ बरतन में उबलने के लिये रख दो । जब उबलते उबलते पानी 100 मिलीलीटर बाकि रहे तो उतार कर छान लों और पीने लायक ठण्डा करके पीना है ।
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सेवन विधी :-
बबूल की फलियों का चूर्ण 3 ग्राम औरहरसिँगार के पत्तों का काढ़ा 100 मिलीलीटर एक बार में पीना है और ऐसी दिन में दो खुराक पीनी हैं । एक बार सुबह को और एक बार शाम को । यह प्रयोग लगातार 60 दिन तक करने से घुटनों में वापिस जान आने लगती है ऐसा हमारी जानकारी में कुछ रोगियों का अनुभव है । यदि इस प्रयोग के साथ रोज एक बार गाय के दूध से बने देशी घी से घुटनों की हल्की हल्की मालिश की जाये तो और भी उत्तम परिणाम मिलने की सम्भावना होती है ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं, फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही इन प्रयोगों को करने की हम आपको सलाह देते हैं ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर करें । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमें भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है ।

सफ़ेद बालो को जड़ से काला कर देगा यह नुस्खा


सही खानपान न होने या प्रदूषण भरे वातावरण के कारण भी कई बार बाल जल्दी सफ़ेद होने लग जाते है. ऐसे में नीचे दी विधि अपनाकर आप अपने बालों को फिर से काला और चमकदार बना सकते है.

सामग्री :- करी पत्ता, दही या छाछ
बनाने की विधि :- सबसे पहले 20 करी पत्तों को लेकर अच्छे से धो ले. फिर उन्हें मिक्सी में दही के 4-5 चम्मच के साथ पेस्ट तैयार कर ले. अब इस पेस्ट को पैक की तरह बालों की जड़ों में लगाएं. पहले
इससे 5 मिनिट तक मसाज करें. फिर इस पैक को बालों में 20 से 25 मिनिट तक लगाकर रखें. इसके बाद बालों को अच्छे से धो ले. आप इस पैक को महीने में दो बार अपने बालों में लगाते रहें. फिर देखें

कमाल, किस तरह आपके बाल हमेशा के लिए रहेंगे काले. डॉक्टर तक भी इस नुस्खे को मान गए है. फिर क्यों लगाना इन कैमिकल्स वाली डाई या कलर की.

आलू से भी करें काले बाल :- यह तरीका पौराणिक एवं कारगर है. आलू में पोटेशियम, आयरन और कैल्शियम पाया जाता है जो बालों को काला करने के अलावा यह उनको गिरने से बचता है, डेंड्रफ से निजात दिलाता है, बालों को मजबूत करता है और बालों को स्वस्थ रखता है.प्रयोग विधि :- दो-तीन आलू के छिलके निकालकर एक कप पानी में उबाल ले. ठंडा होने पर उसमे दो-तीन बूंदे लेवेंडर ऑइल की मिला ले. अब इस मिश्रण को बालों की जड़ों तक अच्छी तरह लगाकर 20 मिनिट के लिए छोड़ दे.फिर ठन्डे पानी से धो ले.


आयुर्वेदिक उपाय

सामग्री: नींबू, आमला पाउडर, साफ पानी।
विधि: नींबू के रस में, 2 चम्‍मच पानी और 4 चम्‍मच आमला पाउडर मिला कर पेस्‍ट बनाइये। 1 घंटे के लिये रख दें और फिर प्रयोग करें।

कैसे लगाएं: इस पेस्‍ट को 20-25 मिनट के लिये बालों और जड़ों में लगाएं और फिर सिर धो लें, लेकिन उस दिन शैंपू का प्रयोग ना करें।

ध्यान रखें ये बाते

बालों को धोते वक्‍त ध्‍यान रखें कि यह आपकी आंखों में ना जाए।
इस पेस्‍ट को हफ्ते में हर चौथे दिन प्रयोग करें। ऐसा करने से आपके सारे सफेद बाल एक ही महीने में काले होने लगेगें।
अगर हो सके तो, आयुर्वेदिक तेल, शैंपू और साबुन का ही प्रयोग करें।
बालों के लिये असली आमले का तेल प्रयोग करें।

हुक्के से धुम्रपान करा कर मरीजों का इलाज


यह तो हम सब जानते है कि धूम्रपान करना सेहत के लिए हानिकारक होता है। और हर जगह बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होता है कि धुम्रपान सेहत के लिए हानिकारक है। लेकिन जो व्यक्ति पहले से बीमार हों उनके लिए तो यह किसी जहर से कम नहीं होता हैं। लेकिन एक ऐसी जगह है जहां पर मरीजों को दवाइयों के रूप में हुक्का पीने के लिए दिया जाता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक ऐसा अस्पताल है, जहां डॉक्टर खुद मरीजों को पीने के लिए हुक्का देते हैं। इस अस्पताल के डॉक्टरों का मानना है कि उनके खास हुक्के को पीने से न सिर्फ दमे के मरीज बल्कि सायनस, सर्दी सहित सभी श्वांस के रोगों से मुक्ति मिल जाती है। लगातार हुक्के का काश लगा रहे ये लोग कोई अपने शोक के लिए किसी हुक्के बार में नहीं बैठे हैं, बल्कि ये सभी अपनी अपनी अलग अलग बीमारियों से पीड़ित होकर उज्जैन के आर्युवेदिक कालेज में अपना इलाज करवा रहे हैं।

दरअसल देश भर में हुक्के को भले ही गलत नजरों से देखा जाता है लेकिन उज्जैन के आयुर्वेदिक अस्पताल में अनोखे तरीके से मरीजों का इलाज किया जाता है। दरअसल संभवतः देश में पहली बार उज्जैन के शासकीय धन्वतरी आर्युवेदिक अस्पताल में हुक्के से धुम्रपान करा कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

वही , अस्पताल का मानना है कि हुक्का पीने से कई लाइलाज बीमारियां ठीक हो जाती हैं। आपको बता दे कि यहां पर तंबाकू वाला हुक्का नहीं दिया जाता बल्कि इसमें तंबाकू की जगह पर जड़ी बूटियों का इस्तेमाल होता है।

बताया जाता है कि इन जड़ी बूटियों का धुआं सीधे शरीर के अंदर जाता है और मरीज को फायदा होता है।

इस अस्पताल के डॉक्टर निरंजन सर्राफ बताते हैं कि उनके पास देश के अलग-अलग हिस्सों से इलाज करवाने के लिए मरीज आते हैं और उनको इलाज से लाभ भी मिलता है। निरंजन ने दावा किया कि उनके अस्पताल का हुक्के पीने से दमा, जुखाम के अलावा फेफड़ों से जुड़ी हुई कई लाइलाज बीमारियां ठीक हो जाती हैं।

तुलसी की पत्तियां खाने के फायदे

आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय गुणों का एक विशेष उल्लेख है। तुलसी को संजीवनी बूटी के समान भी माना जाता है। तुलसी एक पवित्र जड़ी बूटी मानी जाती है और सदियों पहले से इसका इस्तेमाल कई तरह की बीमारियों को ठीक करने में होता आया है। कई घरों में रोजाना सुबह तुलसी के पेड़ की पूजा होती है। इसके सेवन से सर्दी-जुकाम समेत तमाम तरह की समस्याएं बहुत जल्दी ठीक हो जाती हैं। आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय गुणों का एक विशेष उल्लेख है। तुलसी को संजीवनी बूटी के समान भी माना जाता है।

हर रोग से छुटकारा दिलाएगी 1 कप तुलसी और हल्‍दी की चाय
आयुर्वेदिक चिकित्सा में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है।
तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना अलग महत्व है। इसमें एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं जो आपको तमाम तरह के इन्फेक्शन से बचाते हैं और स्वस्थ रहने में मदद करते हैं।
इस आर्टिकल में हम आपको तुलसी की पत्तियों के सेवन से होने वाले कुछ ख़ास फायदों के बारे में बता रहे हैं।

 
ब्लड को प्यूरीफाई करने में मददगार
तुलसी की पत्तियों के सेवन से शरीर में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन बाहर निकलने लगते हैं। ये पत्तियां पूरे शरीर में ब्लड फ्लो को और बेहतर बनाती हैं जिससे सारे अंग ठीक ढंग से काम करते हैं। रिसर्च के अनुसार नियमित रूप से इन पत्तियों के सेवन से खून में लाल रक्त कोशिकाएं और सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा बढ़ जाती है। इसलिए रोजाना तुलसी की 8-10 पत्तियों को शहद के साथ मिलाकर सेवन करें। 
 
 
इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार 
रोजाना तुलसी के सेवन से शरीर की इम्युनिटी पॉवर मजबूत होती है। इसके लिए आप तुलसी युक्त चाय का सेवन करें। इस चाय को पीने से सर्दी-खांसी या जुकाम से तुरंत आराम मिलता है। रोजाना जब भी चाय बनाये तो उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां ज़रूर डालें। 
 
 
स्ट्रेस दूर भगाने में मददगार 
अगर आप हर समय स्ट्रेस में रहते हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो तुलसी से बढ़िया और कुछ भी नहीं है। इन पत्तियों का रोजाना सेवन न सिर्फ आपके मेटाबोलिज्म को बेहतर करता है बल्कि इससे स्ट्रेस, एंग्जायटी और नींद से जुड़ी बीमारियों की समस्या कम हो जाती है। इसलिए रोजाना इन पत्तियों का सेवन ज़रूर करें।

 
ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद
ऊपर बताये हुए सारे फायदों के अलावा तुलसी की पत्तियां आपके ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखने में मदद करती हैं। इन पत्तियों में पोटैशियम, मैग्नीशियम और विटामिन सी की मात्रा काफी ज्यादा होती है जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य रहता है। बेहतरीन परिणामों के लिए रोजाना 5-6 तुलसी की पत्तियां ज़रूर खाएं।

ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद 
तुलसी से रक्त में शुगर के स्तर को कंट्रोल किया जा सकता है। इन पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण होते हैं इसलिए तुलसी के रोज सेवन से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है और डायबिटीज होने का खतरा नहीं रहता है। रोजाना सुबह तुलसी की पत्तियां शहद के साथ खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद है।

 
यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने में मदद
जोड़ों में दर्द होना या किडनी की पथरी होने में सबसे मुख्य कारण यूरिक एसिड ही है। आपको बता दें कि तुलसी के सेवन से शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा कम होती है जिससे जोड़ों के दर्द से आराम मिलता है।

 
मेटाबोलिज्म बढ़ाने में मददगार
इन पत्तियों के सेवन से शरीर की इम्युनिटी पॉवर तो बढ़ती ही है साथ में बॉडी का मेटाबोलिज्म भी बेहतर होता है। इस वजह से आपका पाचन तंत्र ठीक से काम करने लगता है और पेट से जुड़ी बीमारियां खत्म हो जाती हैं।


साँसों से जुड़ी बीमारियों से राहत 
अगर आप रोजाना तुलसी के पत्तियों का सेवन करते रहें तो आपके शरीर का ब्लड फ्लो एकदम ठीक हो जाता है। इस वजह से शरीर के सभी अंगों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलने लगता है और वे ठीक ढंग से काम करने लगते हैं। अगर आपको सांसो से जुड़ी कोई समस्या है तो बेहतर होगा कि आप तुलसी की पत्तियों का सेवन शुरू कर दें। यह अस्थमा के मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद है।

पेट और जांघ की चर्बी कम करना चाहते हैं - नौकासन से दिखेगा फर्क


खानपान में लापरवाही की वजह से पेट की चर्बी बढ़ने लगती है। पेट और जांघों की चर्बी को कम करने में काफी समय लगता है। कई बार तो जिम में पानी की तरह पैसा बहाने के बावजूद इससे निजात पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। अगर आप भी बढ़ती तोंद या जांघों पर जमा होती चर्बी को वाकई कम करना चाहते हैं तो यह करामती आसन आपकी मदद कर सकता है।

इस आसन के दौरान शरीर का आकार नौका जैसा होता है इसलिए इस आसन को नौकासन कहते हैं। यह आसन शरीर को लचीला बनाता है, पेट और शरीर के निचले हिस्से पर जमा फैट्स को घटाता है और एब्स की टोनिंग भी करता है।

नौकासन करने की विधि
- इस आसन को करने के लिए सबसे पहले मैट पर पीठ के बल सीधा लेट जाएं।
- अब सांस लेते हुए दोनों पैर ऊपर उठाएं और दोनों हाथों से पैर के पंजे छूने की कोशिश करें।
- इस स्थिति में शरीर का अग्रभाग और पैर, दोनों ही ऊपर की ओर होने चाहिए।
- कुछ सेकंड इस अवस्था में रहने के बाद सांस छोड़ते हुए लेट जाएं।
- कुछ सेकंड बाद इस प्रक्रिया को दोहराएं।
- करीब 15 सेकंड के गैप पर इस प्रक्रिया को पांच बार दोहराएं और धीरे-धीरे इसकी संख्या बढ़ाते जाएं। इसे अधिकतम 30 बार कर सकते हैं।


नौकासन करने से आपका पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। जिसकी वजह से व्यक्ति को पाचन संबंधित रोग जैसे कब्ज, एसिडिटी, गैस आदि से छुटकारा मिलता है। इतना ही नहीं इस आसन को करने से कमर में थोड़ी बहुत परेशानी हो सकती है लेकिन धीरे धीरे यह आपके कमर को मजबूत बनाता है।

नोट- रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्या या बीपी के मरीज इस आसन को डॉक्टरी परामर्श के बाद ही करें।

पोटली - वायरल, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव


वायरल, मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया का मौसम आ गया है बचाव की कर लें तैयारी, जानिये बचाव की पोटली के बारे में
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चैत्र का महीना शुरू होते ही भारत में वायरल बुखार और मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के रोगियों की सँख्या बढ़ने लगती है । इन सब बिमारियों से बचने का एक बहुत अच्छा तरीका है कि इन सब बीमारियों को पैदा करने वाले मुख्य कारण मच्छरों को पनपने ही ना दिया जाये । हम आपको इस पोस्ट में कुछ उपाय बता रहे हैं जो मच्छरों की प्रजाती को पनपने से रोकेंगे और सबसे आखिर में एक विशेष पोटली बनाने का तरीका जो मच्छरों के प्रकोप से आपको सुरक्षित रखने में मददगार सिद्ध होगी । आइये जानते हैं सावधानियों के बारे में ।
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1 :- अपने घरों के आसपास नालियों, पुराने पड़े टायरों, नारियल के छिलकों और अन्य इस तरह की सभी चीजें जिनमें पानी इकट्ठा हो सकता हो उन सबकी सफाई पर पूरा ध्यान रखें । नालियों में पानी रुकने ना दें और अन्य पड़ी चीजों जिनमें पानी जमा हो सकता है उस अबको नष्ट कर दें ।
2 :- अपने क्षेत्र की नगर पालिका अथवा नगर पंचायत, नगर निगम आदि से सामूहिक रूप से क्षेत्र में मेलाथियॉन नामक दवा के छिड़काव का आग्रह करें ।
3 :- अपने घर के अन्दर आप पाइरेथ्रम नामक दवा का छिड़काव करवायें । ये दवायें और इनको छिड़काव करने वाले आपको अपने क्षेत्र में किसी कीटनाशक बेचने वाली दुकान पर मिल जायेंगें ।
4 :- कूलर और पानी के अन्य भण्डारों को दस दिन में एक बार जरूर साफ करें और उसमें सफाई के बाद क्लोरीन डालें ।
5 :- पानी की टंकियॉ जो छत पर लगी होती है उनको 3 सप्ताह में जरूर साफ करवा लें और इनका ढक्कन को अच्छे से बंद करके रखें ।
6 :- घर में पालतु मवेशी हैं तो उनके रहने की जगह से गोबर और मूत्र को रोज नियमित साफ रखें ।
7 :- मच्छरों से बचाव के लिये मच्छरदानी और ऑलआऊट जैसी मशीन लगा कर सोयें ।
8 :- अगर कुछ घण्टों से बंद कमरे में प्रवेश करना है तो उस कमरें में पहले मच्छर मारने का कार्ड जलाकर कमरे को पुनः 5 मिनट के लिये बंद कर दें उसके बाद ही प्रवेश करें ।
9 :- सफाई का विशेष ध्यान रखें ।
10 :- कपड़े जहॉ तक सम्भव हो पूरी आस्तीन के ही पहनें ।
11 :- विटामिन सी वाले फलों जैसे कि नीम्बू, संतरा, चकोतरा आदि का नियमित सेवन करें ।
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घर में लगायें यह सुरक्षा पोटली :-
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घर के वातावरण को शुद्ध रखने के लिये और मच्छरों के पनपने से रोकने के लिये घर में यह सुरक्षा पोटली जरूर लगायें । इसको बनाने की विधी बहुत सरल है । इसको बनाने के लिये आपको निम्न सामग्री की जरूरत पड़ेगी ।
1 :- दालचीनी 5 ग्राम
2 :- लौंग 2 ग्राम
3 :- कपूर 20 ग्राम
4 :- नीम का तेल 10 मिलीलीटर
5 :- साफ सूती कपड़े का टुकड़ा
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साफ सूती कपड़े के टुकड़े पर ऊपर लिखी गयी मात्रा में दालचीनी लौंग और कपूर को रखकर उसकी एक छोटी सी पोटली बना लें और इस पोटली को नीम के तेल में डुबोकर कुछ समय के लिये खाली प्लेट में रख दें जिससे अतिरिक्त तेल निकल जाये । इस तरह की चार पाँच पोटली बना कर घर के सभी कमरों में किसी खुली जगह पर लटका दें । ध्यान रखें हर 10 दिन बाद इस पोटली को बदल कर नयी पोटली लगानी है । परिवार को सुरक्षित रखने के लिये इतना प्रयास किया जाना उचित भी है ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो क्रपया लाईक और शेयर जरुर कीजियेगा । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमको भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है ।

बासी रोटी खाने के ये फायदें जानकर हैरान रह जाएंगे


दोस्तों, अक्सर घरों में बासी रोटी बच जाती है और घर के सदस्य इसे खाने से इनकार कर देते हैं। ज्यादातर घरों का यही हाल रहता है। पर क्या आप जानते हैं बासी रोटी खाने से हमारे शरीर को बहुत फायदे मिलते हैं। आपको यह सुनकर थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा पर यह बिल्कुल आजमाया हुआ एक पुराना नुस्खा है। तो आइए, जान लेते हैं इसके हैरान कर देने वाले फायदों के बारे में:-


(1) डायबिटीज की समस्या दूर हो जाती है

बासी रोटी को दूध के साथ मिलाकर खाने से डायबिटीज की समस्या दूर हो जाती है। जिन लोगों के खून में शुगर का लेवल बढ़ा हुआ है उन्हें हर सुबह दूध में बासी रोटी मिलाकर जरूर खाना चाहिए। इससे इस बीमारी के इलाज में काफी मदद मिलती है।   
(2) ब्लड प्रेशर समस्या दूर हो जाएगी

आजकल लोगों में तेजी से ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती जा रही है। हर तीसरा आदमी इस समस्या से ग्रस्त है साथ ही इसके कारण अन्य कई तरह की बीमारियां भी उत्पन्न हो रही है। पर यदि दूध के साथ बासी रोटी का सेवन किया जाए तो ब्लड प्रेशर समस्या दूर हो जाएगी और यह सामान्य बना रहेगा।
(3) एसिडिटी, अनपच, गैस, बदहजमी नहीं होती

कोई कितना भी बाहर का खाना क्यों ना खा ले। पर जब तक रोटी ना खाए पेट भरने का एहसास नहीं होता। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। बासी रोटी खाने से पेट संबंधित समस्याएं जैसे कि एसिडिटी, अनपच, गैस, बदहजमी नहीं होती।

(4) हृदय संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है

बासी रोटी खाने से शरीर का तापमान सामान्य बना रहता है और इससे हृदय संबंधित बीमारियों का भी खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

ताजी रोटी की अपेक्षा बासी रोटी अधिक पौष्ट‍िक होती है, क्योंकि लंबे समय तक रखे रहने के कारण इसमें जो बैक्टीरिया होते हैं वे सेहत बनाने में लाभकारी होते हैं। 

कृपयां यह जानकारी अपने सभी दोस्तो, रीश्तेदार वं सगे-सम्बंधी के साथ शेयर करें!

किडनी मे जमां हुवां कचरा केवल पांच दिनो मे साफ


आजकल हम देखते है की लाखो लोगो की किडनी फैल हो रही है | रोज हजारो लोग किडनी रोगी बनते जा रहे है | क्योकी शुगर वं हाइब्लडप्रेशर वं हार्ट की ज्यादातर दवाइयां किडनी पर बुरा असर करके किडनी को फैल कर देती है | जबकी इनसे बचा भी जा सकतां है |

क्यां आप चाहते है की आपकी किडनी से जमां हुवा कचरा सिर्फ पांच दिनो मे निकल जाए


आपको यह प्रयोग केवल पांच दिनो तक करनां है आप पांच दिनो मे खूद महसुस करेंगे की आपकी किडनी पहले से ज्यादा काम कर रही है | मूञ-पेशाब ठिक से आ रहां है | शरीररमे जो पहले अधिक पसीनां आतां था वह बहोत कम होतां महसुस करेंगे | शरीरकी अतिरीक्त गर्मी को भी आप कम होतां हुवां अपने आप देखेंगे | आैर इस प्रयोग दरम्यान आप देखेंगे की आपको पेशाब की माञा बहोत ही बढ़ जायेगी आेर सालो से किडनी मे जमां हुवा टोक्सीक( जहर ) युरीन के द्वारा बहार निकल जायेगा | आैर 70% किडनी फैल होने के चान्स नही रहेंगे क्योकी आपकी किडनी को खराब करने वाला (टोक्सीक) जहर को पुरी तरह ही बहार निकाल देगा यह प्रयोग | 


>>> पांच दिनो मे किडनी मे जमां हुवां कचरा को पूरी तरह साफ करने वाला प्रयोग <<<

40 ग्राम फ्रेश हरां धनियां लिजिए आैर २ ग्लास पानी के साथ मिक्स करके मिक्षर मे ज्युस बनां लिजिए आैर सुबह खालीपेट सेवन करीए | यह एक खूराक है | इसी तरहां पांच दिनो तक इसी प्रकार प्रयोग करे | फीर जरुरत नही है इस प्रयोग की | 

नोंध:- यह प्रयोग जिसकी  किडनी फैल्योर हो चूकी है उनके लिए नही है


कृपयां यह जानकारी अपने सभी दोस्तो, रीश्तेदार वं सगे-सम्बंधी के साथ शेयर करें ताकी कीसीकी भी किडनी खराब नां हो!

नकारात्मक विचारों से छुटकारा पाने के तरीके


Suppose करिए कि आपकी बार-बार एक ही negative thought को सोचने की बुरी आदत है. और suppose करिए कि असल दुनिया में उस सोच की कोई अभिव्यक्ति नहीं है. वो बस एक नकारात्मक सोच है , जैसे ” मैं बहुत depressed हूँ” या ” मुझे अपनी नौकरी से नफरत है” या ” मैं ये नहीं कर सकता” या “मुझे अपने मोटापे से नफरत है.” आप किसी बुरी आदत से कैसे छुटकारा पायेंगे जब वो पूरी तरह से आपके दिमाग में हो ?

असल में negative thought pattern को बदलने के बहुत सारे तरीके हैं. Basic idea ये है कि पुराने thought pattern को नए से replace कर दिया जाए. मानसिक रूप से नकारात्मक सोच का विरोध करना उल्टा पड़ सकता है- आप इसे और मजबूत करते जायेंगे और स्थिति बदतर हो जाएगी. आप जितना अपने neurons को उसी दिशा में fire करेंगे, आपकी नकारात्मक सोच उतनी ही शशक्त होती जायेगी.
यहाँ एक तरीका है जो मैं अपने negative thought patterns को break करने के लिए use करता हूँ. ये basically एक memory technique जिसे ‘chaining’ कहते हैं से मिला जुला कर बना है. ये तरीका मेरे लिए बहुत सही काम करता है.

Negative Thought pattern का विरोध करने का प्रयास करने की बजाये आप इसकी दिशा बदल दीजिये. इसे आप एक mental kung fu की तरह से समझिये. नकारात्मक सोच की उर्जा को लीजिये और उसे सकारात्मक सोच की तरफ मोड़ दीजिये. थोड़ी सी mental conditioning के साथ जब भी आपके दिमाग में negative thought आएगी , आपका दिमाग खुद बखुद positive thought की तरफ divert हो जाएगा. ये Pavlov’s dogs की तरह है जो घंटी बजने पर लार टपकाना सीख जाते हैं.
ये ऐसे काम करता है:
मान लीजये आपकी negative thought एक subvocalization है, मतलब आपको अन्दर से एक आवाज़ सुनाई देती है जिसे आप बदलना चाहते हैं , जैसे कि, ” मैं idiot हूँ”. अगर आपकी negative thought एक आवाज़ होने की बजाये एक mental image (कोई चित्र जो दिमाग में आता हो) या kinesthetic ( कोई अन्दर होने वाला एहसास) हो तो भी आप इस process को use कर सकते हैं. कई मामलों में आपका विचार इन तीनों का combination भी हो सकता है.


Step 1: अपनी negative thought को एक mental image में बदल लें.

उस आवाज को सुनिए और दिमाग में उसकी एक तस्वीर बना लीजिये.For Example, यदि आपकी सोच है कि ,“मैं idiot हूँ”, तो कल्पना कीजिये कि आप मूर्खतापूर्ण कपडे पहने और जोकरों वाली टोपी लगाकर इधर उधर कूद रहे हैं. आपके चारो तरफ लोग खड़े हैं जो आपकी तरफ ऊँगली दिखा रहे हैं और आप चिल्ला रहे हैं, “मैं idiot हूँ” आप इस scene को जितना बढ़ा चढ़ा कर देखेंगे उतना बेहतर है . चटक रंगों, खूब सारे animation,यहाँ तक कि आप कुछ sex से भी सम्बंधित सोच सकते हैं यदि ये आपको याद रखने में मदद करे. इस scene को बार-बार तब तक practice करते रहिये जब तक महज वो negative line सोचने भर से आपके दिमाग में आपकी कल्पना की हुई negative mental image ना आने लगे.

यदि आपको उस विचार का चित्रण करने में दिक्कत हो तो आप उसे एक आवाज़ का भी रूप दे सकते हैं. अपनी negative thought को एक आवाज़ में बदल लें , जैसे कि कोई धुन जिसे आप गुनगुनाते हों. इस प्रोसेस follow करने में को चाहे एक sound की कल्पना करें या किसी चित्र की , दोनों ही तरह से ये काम करेगा. वैसे मैं किसी चित्र के बारे में कल्पना करना prefer करता हूँ.


Step 2: उस negative thought को replace करने के लिए कोई powerful positive thought चुनें.

अब decide करिए की negative thought को replace करने के लिए आप कौन सी positive thought चुनेंगे. जैसे कि यदि आप ये सोचते रहते हैं कि, ” मैं idiot हूँ,” तो शायद आप उसे , “मैं brilliant हूँ.” से replace करना चाहेंगे. कोई ऐसी सोच चुनिए जो आपको कुछ इस तरह से शशक्त बनाए कि आप उस negative thought के असर को कमजोर बना पाए.


Step 3: अब अपनी positive thought को एक mental image में बदल लें

एक बार फिर से Step 1 की तरह ही अपनी positive thought के लिए एक mental image बना लें. जैसे कि उदाहरण में ली गयी सोच “में brilliant हूँ” के लिए आप खुद को Superman की तरह दोनों हाथ कमर पर रख कर खड़ा हुआ होने की कल्पना कर सकते हैं.और आप सोच सकते हैं कि ठीक आपके सर के ऊपर एक bulb जल रहा है. Bulb बहुत तेज रौशनी के साथ जगमगा रहा है, और आप जोर से चीख रहे हैं, ” मैं bbbbrrrrrillllliannnnttt हूँ !”. इसकी practice तब तक करते रहिये जब तक महज वो positive line सोचने भर से आपके दिमाग में आपकी कल्पना की हुई positive mental image ना आने लगे.


Step 4: अब दोनों mental images को एक साथ जोड़ दीजिये.

आपने Step 1 और Step 3 में जो mental image सोची है , दोनों को अपने दिमाग में चिपका दीजिये. ये trick chaining नामक memory technique में प्रयोग होती है. इसमें आप पहले चित्र को दुसरे में परिवर्तित कर देते हैं. मेरा सुझाव है कि आप इस एक animated movie की तरह करिए. इसमें आपको पहला (negative picture) और आखिरी (positive picture) scene का अंदाजा है, बस आपको बीच में एक छोटा सा एनीमेशन भरना है.

For example, पहले scene में आपके idiot version पर कोई एक light bulb फेंकता है.और आप उस बल्ब को कैच कर लेते हैं और आपके पकड़ते ही वो बल्ब बड़ा होने लगता है और उससे इतनी तेज रौशनी निकलती है कि आपको घेरे हुए लोग चौंधिया जाते हैं. तब आप अपने मूर्खतापूर्ण कपड़ों को फाड़ कर फेंक देते हैं और चमचमाते सफ़ेद लिबास में प्रकट होते हैं. आप Superman की तरह पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़े होकर जोर से चिल्लाते हैं, ” ” मैं bbbbrrrrrillllliannnnttt हूँ !”और फिर वो लोग अपने घुटनों के बल बैठ जाते हैं और आपकी पूजा करने लगते हैं. एक बार फिर , आप इसे जितना बढ़ा-चढ़ा कर सोचेंगे उतना अच्छा होगा. बढ़ा-चढ़ा कर सोचना आपको scene को याद रखें में मदद करेगा क्योंकि हमारा दिमाग unusual चीजों को याद रखने के लिए designed होता है.

एक बार जब आप पूरा scene complete कर लें तो फिर बाद-बाद इसे अपने दिमाग में दोहरायें ताकि speed आ जाये. इस scene को शुरू से अंत तक तब तक imagine करते रहिये जब तक कि आप पूरा का पूरा scene 2 मिनट में complete नहीं कर लेते, ideally 1 मिनट में. ये बिजली की तेजी से होना चाहिए, वास्तविक दुनिया से कहीं तेज.

Step 5: Test.

अब आपको अपने mental redirect को टेस्ट करना है कि ये काम कर रहा है कि नहीं. ये बहुत हद्द तक HTML redirect की तरह है – जब आप पुराना negative URL input करते हैं, तब आपका दिमाग उसे automatically positive की तरफ redirect कर देता है.Negative thought के दिमाग में आते ही तुरन्त positive thought आपके दिमाग में आ जानी चाहिए. अगर आपने ये सही से practice किया है तो ये automatically होने लगेगा. Negative thought दिमाग में आते ही पूरा का पूरा scene आपके दिमाग में घूम जायेगा. इसलिए आप जब भी ये सोचेंगे कि , ” मैं idiot हूँ “, भले आप पूरी तरह से aware ना हो कि आप ऐसा सोच रहे हैं, आप अंत में खुद को ये सोचता हुआ पायेंगे कि, “मैं brilliant हूँ”

अगर आपने पहले ऐसा visualization नहीं किया है तो आपको ये सब करने में कुछ समय लगेगा. Speed practice के साथ आएगी. एक बार अभ्यास हो जाने के बाद सारी चीजें सेकेंडों में हो जाएँगी. पहली बार करने में चीजें धीमी गति से होंगी,इससे discourage मत होइए . किसी भी और skill की तरह इसे भी learn किया जा सकता है,और शायद पहली बार सीखने में ये आपको ये कुछ अटपटा लगे.
मेरा सुझाव है कि आप अलग-अलग तरह की कल्पना के साथ experiment करिए. आपको कुछ कल्पनाएँ बाकियों से सही लगेंगी. Association Vs. Dissociation पर ख़ास ध्यान दीजिये. जब आप किसी scene से associated होंगे तो आप उसे अपनी आँखों से घटता हुआ देखेंगे( i.e. first person perspective). जब आप dissociated होंगे तो आप उस scene में खुद को देखने की कल्पना करेंगे ( i.e. third person perspective). आम तौर पर मुझे best results खुद को dissociate करने पर मिलते हैं. आपके results अलग हो सकते हैं.

मैंने 1990s की शुरआत में इस तरह की काफी mental conditioning की है. जब भी मुझे इस तरह की कोई नकारात्मक सोच परेशान करती थी तो मैं उसे चुनता था और उसकी दिशा बदल देता था.कुछ ही दिनों में मैंने दर्जनों negative thought patterns को reprogram कर दिया था, और कुछ ही दिनों में मेरे दिमाग के लिए negative thought या emotion produce करना भी कठिन हो गया. ऐसी कोई भी सोच positive सोच की तरफ redirect हो जातीं.शायद कुछ हद तक इसीलिए मैं college से निकलने के तुरंत बाद अपन business start करने में पूरा confident था.मैं mental conditioning के माध्यम से अपनी self-doubt सम्बंधित thoughts को can-do mindset में बदल देता था. कालेज के दिनों में मैंने इसका खूब प्रयोग किया और शायद इसी वजह से मैंने औरों से जल्दी graduate हो पाया.इसके बावजूद मुझे कई real-world challenges को face करना पड़ा, पर कम से कम मैं उस समय खुद के self-doubt से नहीं लड़ रहा था.
इस तरह की mental conditioning ने मुझे अपने अंदरुनी मामलों को control करने में काफी सहायता की.आज मैं ये इतना भली-भांति कर लेता हूँ कि बिना इसके बारे में सोचे ही ये automatically होता रहता है. किसी point पर मेरे subconscious ने इसका कंट्रोल ले लिया; इसलिए जब कभी मेरे मन कोई ऐसा विचार आता है कि , “I can’t” तो वो स्वतः ही ,”How can I?” में परिवर्तित हो जाता है. दरअसल जब आप mental conditioning को बहुत ज्यादा practice कर लेते हैं तो यही होता है- आपका subconscious कंट्रोल ले लेता है;ठेक विअसे ही जैसे कि साइकिल चलाने की practice के बाद हो जाता है.

अब जब कभी आपको लगे कि कोई negative thought आपके दिमाग में घर कर रही हो तो इसे try कीजिये. मेरे विचार है कि आप इसे काफी सशक्त बनाने वाला पाएंगे. और जिन्हें इससे फायदा पहुँच सकता है उनके साथ जरूर share करिए.

प्रेग्नेंसी जांचने का ये घरेलू तरीका

प्रेग्नेंसी जांचने का ये घरेलू तरीका बहुत कम लोगों को हीं पता है!

मां बनने का अनुभव हर एक स्त्री के लिए बहुत ही खास होता है। हर औरत मां बनने को लेकर बहुत ही उत्साहित रहते हैं। जब प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तब महिलाएं प्रेगनेंसी कंफर्म करने के लिए प्रेगनेंसी टेस्ट किट का प्रयोग करती हैं। ऐसे तो बहुत सारे किट आज बाजार में उपलब्ध है, लेकिन आज इस आर्टिकल में हम आपको प्रेगनेंसी जांचने का आसान और घरेलू तरीका बताएंगे।


ब्लीच से प्रेग्नेंसी की जांच -

घर पर प्रेगनेंसी जांचने का यह सबसे आसान तरीका है। इसके लिए एक पारदर्शी ग्लास में अपने यूरिन के साथ थोड़ा सा ब्लीच मिलाकर कुछ सेकंड के लिए छोड़ दें। अगर यह मिश्रण प्रतिक्रिया करके झाग बनाना शुरु कर देता है तो इसका मतलब है कि आप सचमुच मां बनने वाली हैं। हालांकि इस प्रक्रिया के दौरान थोड़ी-सी सावधानी बरतना भी आवश्यक है। इस प्रयोग को किसी खुली जगह पर ही करना चाहिए।


शक्कर से प्रेग्नेंसी की जांच -

शक्कर से प्रेगनेंसी की जांच करना भी बहुत ही आसान है। इसके लिए प्लास्टिक कप में थोड़ा चीनी रखकर उसमें अपना यूरिन मिलाएं। अगर शक्कर घुलने की बजाय लरछे जैसा पदार्थ बनाने लगता है तो इसका मतलब परिणाम पॉजिटिव है और आप मां बनने वाली हैं।


सफेद टूथपेस्ट से प्रेग्नेंसी की जांच -

वैसे तो टूथपेस्ट का उपयोग हम दांत साफ करने के लिए करते हैं, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसके प्रयोग से आप प्रेग्नेंसी जांच भी कर सकती हैं। इसके लिए आप थोड़ा सफेद टूथपेस्ट लें और इसे एक पारदर्शी प्लास्टिक बैग में अपनी यूरिन के साथ मिलाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। अगर सफेद टूथपेस्ट का रंग नीला पड़ जाए तो समझिए आप मां बनने वाली हैं। हालांकि रंग बदलने में कितना समय लग जाएगा, यह कहा नहीं जा सकता।

इनमें से आपको कौन सा उपाय सबसे अच्छा लगा हमें जरूर बताएं। अगर आपको यह जानकारी शेयर करने लायक लगती है तो इसे शेयर भी जरूर कर देना।
सफर में होती है उल्टी तो आजमायें ये नुस्खे.

सफर में होती है उल्टी तो आजमायें ये नुस्खे.

घूमने का शौक किसे नहीं होता, पर सफ़र का मज़ा तब ही आता है जब आपको किसी परेशानी का सामना ना करना पड़े. अधिकतर लोगों की सफ़र के दौरान तबियत ख़राब होने लगती है. सबसे ज़्यादा शिकायत लोगों को उल्टी की होती है. कुछ लोगों को तो कार, ट्रेन या बस में लम्बा सफ़र करने पर उल्टी आने लगती है. वैसे तो वे ठीक रहते हैं पर सफ़र के दौरान परेशान रहते हैं. उल्टी की समस्या कई लोगों को पहाड़ी एरिया में सफ़र के दौरान भी होती है और कुछ को तो ऊँचाई से भी. इस वजह से उनका सफ़र शुरू होने से पहले ही खत्म हो जाता है और वो सफ़र का आनंद भी नहीं ले पाते. तो आईये हम आपको बताते हैं कुछ उपाय जिसे आप अपने सफ़र के दौरान आज़मा सकते हैं.

प्याज़ का रस
सफ़र पे निकलने से आधे घंटे पहले अगर आप 1 चमच्च प्याज़ के रस में 1 चमच्च अदरक के रस को मिलाकर पियेंगे तो आपको उल्टियों से राहत मिलेगी. पर अगर आपका सफ़र ज़्यादा लम्बा है तो इस मिश्रण को आप अपने साथ बनाकर भी रख सकते हैं.

लौंग करे जादू
सफ़र करते वक़्त आपको जैसे ही उल्टी जैसा लगने लगे आप लौंग को मुंह में रखकर चूसे. ऐसा करने से जी मचलना और उलटी जैसा लगना बंद हो जाएगा.
अदरक है लाभदायक
अदरक में एंटीमैटिक गुण होते हैं. एंटीमैटिक गुण वाले पदार्थ उल्टी और चक्कर आने पर फायेदेमंद साबित होते हैं. सफ़र करते वक़्त उल्टी जैसा महसूस हो तो अदरक की चाय पियें या अदरक की गोलियों को अपने साथ रखें और थोडा थोडा कर के चबाएं. इससे आपका जी नहीं मचलेगा और उल्टी नहीं होगी.

पुदीना दे साथ
पुदीना आपकी पेट की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे यात्रा के दौरांन तबियत ख़राब और चक्कर आने की स्थिति समाप्त हो जाती है. पुदीना का तेल भी उल्टी होने से रोकता है. पुदीने के तेल की कुछ बूँदें अपने रुमाल पर छिड़क कर रखें और उल्टी जैसा महसूस होने पर इसे सूंघे. इसके अलावा सूखे पुदीने के पत्तों को गर्म पानी में उबालकर चाय बनाएं और इसमें एक चमच्च शहद मिलाएं. निकलने से पहले इसका सेवन करें. आपको आराम मिलेगा.

नींबू करे कमाल
नींबू में भरपूर मात्रा में सिट्रिक एसिड होता है. एक छोटे कप में गर्म पानी लें और उसमे 1 चमच्च नींबू का रस और चुटकी भर नमक मिलाएं. इसे अच्छे से मिलाकर पी लें. यह एक असरदार औषधि है और सफ़र के दौरान होने वाली परेशानियों को आपसे दूर रखता है

हकलाने -तुतलाने की समस्या से परेशान है - शंख मुद्रा कर लें !



हकलाने -तुतलाने वाला व्यक्ति यह तो जानता है कि उसे क्या बोलना है, लेकिन वह बोल नहीं पाता और एक ही अक्षर या शब्द बार-बार दोहराता है। यह समस्या बोलने से जुड़ी मांसपेशियों और जीभ पर नियंत्रण न होने से पैदा होती है। अगर आप भी ऐसी ही किसी समस्या से परेशान है तो ये खबर आपके लिए ही है।

शंख मुद्रा करने के लिए सबसे पहले दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर हथेलियां दबाएं। इसके बाद बाएं हाथ के अंगूठे को दोनों हाथ की मुट्ठी बनाकर उसमें बंद कर लें और फिर बाएं हाथ की तर्जनी उंगली को दाएं हाथ के अंगूठे से मिलाएं। इस तरह से शंख मुद्रा बन जाती है। इस मुद्रा में बाएं हाथ की बाकी तीन उंगलियों के पास में सटाकर दाएं हाथ की बंद उंगलियों पर हल्का-सा दबाव दिया जाता है। ठीक इस तरह ही हाथ को बदलकर अर्थात् दाएं हाथ के अंगूठे को बाएं हाथ की मुट्ठी में बंद करके शंख मुद्रा बनाई जाती है।





 


सावधानियां
जिन लोगों को कफ की समस्या रहती हो उन्हें यह मुद्रा अधिक समय तक नहीं करनी चाहिए। शंख मुद्रा को किसी भी समय किया जा सकता है। प्रतिदिन 15 मिनट दिन में तीन बार 30 से 45 मिनट इसका अभ्यास किया जा सकता है।


आंव या पेचिश का उपचार, लक्षण, परहेज


आंव(Dysentery)आने का रोग किसी भी व्यक्ति को हो जाता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए बल्कि इसका इलाज सही तरीके से करना चाहिए-मल त्याग करते समय या उससे कुछ समय पहले अंतड़ियों में दर्द, टीस या ऐंठन की शिकायत हो तो समझ लेना चाहिए कि यह पेचिश का रोग है-इस रोग में पेट में विकारों के कारण अंतड़ी के नीचे की तरफ कुछ सूजन आ जाती है और उस हालत में मल के साथ आंव(Dysentery)या खून आने लगता है-



यदि मरोड़ के साथ खून भी आए तो इसे रक्तातिसार कहते हैं एक प्रकार का जीवाणु आंतों में चला जाता है जो पेचिश(Dysentery)की बीमारी पैदा कर देता है यह रोग पेट में विभिन्न दोषों के कुपित होने की वजह से हो जाता है-


यह रोग मक्खियों से फैलता है इसमें रोग के जीवाणु रोगी के मल में ही मौजूद रहते हैं जब कभी पेचिश(Dysentery)का रोगी खुले में मल त्याग करता है तो उस पर मक्खियां आकर बैठ जाती हैं वे उन जीवाणुओं को अपने साथ ले जाती हैं और खुली हुई खाने-पीने की चीजों पर छोड़ देती हैं फिर जो व्यक्ति उन वस्तुओं को खाता है उनके साथ वे जीवाणु उसके पेट में चले जाते हैं और इस तरह उस व्यक्ति को भी पेचिश की बीमारी हो जाती है-


आंव या पेचिश के लक्षण-


1- कच्चा और कम पचा भोजन भी पेट में कुछ समय तक पड़ा रहता है तो वह सड़कर पाचन संस्थान में घाव पैदा कर देता है इससे भी आंव(Dysentery)का रोग हो जाता है-


2- शुरू में नाभि के पास तथा अंतड़ियों में दर्द होता है और लगता है जैसे कोई चाकू से आंतों को काट रहा है इसके बाद गुदा द्वार से पतला,लेसदार और दुर्गंधयुक्त मल बाहर निकलना शुरू हो जाता है पेट हर समय तना रहता है और बार-बार पाखाना आता है तथा मल बहुत थोड़ी मात्रा में निकलता है जिसमें आंव और खून मिला होता है कभी-कभी बुखार भी आ जाता है-


3- जब आंव आने का रोग किसी व्यक्ति को हो जाता है तोइसके कारण व्यक्ति के मल के साथ एक प्रकार का गाढ़ा तेलीय पदार्थ निकलता है आंव रोग से पीड़ित मनुष्य को भूख भी नहीं लगती है रोगी को हर वक्त आलस्य, काम में मन न लगना, मन बुझा-बुझा रहना तथा अपने आप में साहस की कमी महसूस होती है-


आंव या पेचिश(Dysentery) का उपचार-




1- दस ग्राम सूखा पुदीना और दस ग्राम अजवायन तथा एक चुटकी सेंधा नमक और दो बड़ी इलायची के दाने लेकर आप इन सबको पीसकर चूर्ण बना लें तथा सुबह-शाम भोजन के बाद एक-एक चम्मच चूर्ण मट्ठे या ताजे पानी के साथ लें-


2- पुरानी पेचिश में तीन-चार दिन तक काली गाजर का रस सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें-


3- आम की गुठली को सुखा लें फिर उसमें से गिरी निकालकर पीसें और दो चम्मच चूर्ण दही या मट्ठे के साथ सेवन करें-


4- चार-पांच कालीमिर्च मुख में रखकर चूसें तथा थोड़ी देर बाद आधा गिलास गुनगुना पानी पी लें


5- दो चम्मच जामुन का रस और दो चम्मच गुलाबजल आप दोनों को मिलाकर उसमें जरा-सी खांड़ या मिश्री डालकर तीन-चार दिन तक पिएं


6- अनारदाना,सौंफ तथा धनिया-इन तीनों को 100-100 ग्राम की मात्र में कूट-पीसकर चूर्ण बना लें फिर आप इसमें थोड़ी-सी मिश्री मिलाकर दिन भर में चार बार नीम की सात-आठ कोंपलें और मिश्री के साथ सेवन करें


7- एक कप गरम पानी में दस ग्राम बबूल का गोंद डाल दें और थोड़ी देर बाद जब बबूल फूल जाए तो पानी में मथकर उसे सेवन करें ये मल को बांधता है


8- कच्चे केले का रस एक चम्मच सुबह और एक चम्मच शाम को जीरा या कालीमिर्च के साथ सेवन करें


9- एक चम्मच ईसबगोल की भूसी 250 ग्राम दूध में भिगो दें और जब भूसी फूल जाए तो रात को जरा-सी सोंठ और जरा-सा जीरा मिलाकर सेवन करें


10- पुराने आंव को ठीक करने के लिए प्रतिदिन सुबह बिना कुछ खाए-पिए दो चम्मच अदरक का रस जरा-सा सेंधा नमक डालकर सेवन करें या फिर पुरानी पेचिश में आधा चम्मच सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें


11- बीस ग्राम फिटकिरी और तीन ग्राम अफीम पीसकर मिला लें तथा इसमें से दो रत्ती दवा सुबह-शाम पानी के साथ लें


12- छोटी हरड़ का चूर्ण घी में तल लें फिर वह चूर्ण एक चुटकी और चार ग्राम सौंफ का चूर्ण मिलाकर दें


13- जामुन के पेड़ की छाल 25 ग्राम की मात्र में लेकर सुखा लें फिर उसका काढ़ा बनाएं और ठंडा होने पर दो चम्मच शहद मिलाकर पी जाएं


14- खूनी पेचिश में मट्ठे के साथ एक चुटकी जावित्री लेने से भी काफी लाभ होता है


15- सौंफ का तेल पांच या छ: बूंदें एक चम्मच चीनी में रोज दिन में चार बार लें


16- पेचिश रोग में नीबू की शिकंजी या दही के साथ जरा-सी मेथी का चूर्ण बहुत लाभदयक है


17- सेब के छिलके में जरा-सी कालीमिर्च डालकर चटनी पीस लें अब इस चटनी को सुबह-शाम भोजन के बाद सेवन करें


18- पेचिश होने पर आधे कप अनार के रस में चार चम्मच पपीते का रस मिलाकर पिएं


19- केले की फली को बीच से तोड़कर उसमें एक चम्मच कच्ची खांड़ रखकर खाएं तथा एक बार में दो केले से अधिक न खाएं



परहेज-
1- जितना हो सके आप बासी भोजन, मिर्च-मसालेदार पदार्थ, देर से पचने वाली चीजें, चना, मटर, मूंग आदि का सेवन न करें


2- वायु बनाने वाले पदार्थ खाने से भी पेचिश में आराम नहीं मिलता है अत: बेसन, मेदा, आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, भिण्डी, करेला, टिण्डे आदि नहीं खाना चाहिए


3- रोगी को भूख लगने पर मट्ठे के साथ मूंग की दाल की खिचड़ी दें


4- पानी में नीबू निचोड़कर दिनभर में चार गिलास पानी पिएं-इससे पेचिश के कारण होने वाली पेट की खुश्की दूर होती रहेगी


5- भोजन के साथ पतला दही, छाछ, मट्ठा आदि अवश्य लें तथा सुबह-शाम खुली हवा में टहलें और स्नान करने से पहले सरसों या तिली के तेल की शरीर में मालिश अवश्य करें-रात को सोते समय दूध के साथ ईसबगोल की भूसी एक चम्मच की मात्रा में लेने से सुबह सारा आंव निकल जाता है

तिल्ली (Spleen) बढ़ गयी है - घरेलूउपचार



तिल्ली (Spleen) बढ़ गयी है तो ये घरेलूउपचार बहुत काम के सिद्ध होते हैं
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तिल्ली हमारे शरीर का एक बहुत ही बहुत महत्तवपूर्ण अंग है जो सारे शरीर की रोग प्रतिरोधी शक्ति बढ़ाने के लिये चुपचाप काम करता रहता है । तिल्ली में अक्सर समस्यायें कम होती हैं किंतु यदि कोई समस्या हो भी जाये तो आयुर्वेदिक चिकित्सा और आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खों के द्वारा उन पर काबू पाया जा सकता है । इस पोस्ट में जानिये कुछ ऐसे अति लाभकारी घरेलू नुस्खों के बारे में जो तिल्ली बढ़ जाने की समस्या में बहुत अच्छा परिणाम देते हैं ।
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1 :- नीम्बू का प्रयोग :-
नीम्बू को हल्का गर्म करके उसको बीच में से काटकर उस पर सेंधा नमक लगाकर रोज दोनों समय भोजन से पूर्व चूसने से कुछ ही सप्ताहों में तिल्ली अपने आकार में वापिस आ जाती है ।
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2 :- पपीते का सेवन :-
तिल्ली बढ़ने की समस्या में पपीते का सेवन बहुत ही लाभकारी माना जाता है । तिल्ली के रोगी को रोज एक बार कच्चे पपीते की सब्जी अथवा पके पपीते के फल का सेवन जरूर करना चाहिये ।
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3 :- करेले का सेवन :-
करेले का सेवन तिल्ली के रोगी के लिये अमृत से कम नही होता है । तिल्ली के बढ़ जाने के रोगियों को रोज 100 मिलीलीटर करेले के रस का सेवन जरूर करना चाहिये ।
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4 :- अजवायन का सेवन :-
अजवायन का सेवन तिल्ली के रोगी को किसी ना किसी तरह से जरूर करना चाहिये । अजवायन को भून कर भी खाया जा सकता है और कच्चा भी पानी के साथ सेवन किया जा सकता है । भूनी हुयी अजवायन को गाजर के ताजे निकाले हुये रस के साथ घोलकर भी सेवन करने से बहुत ही उत्तम लाभ प्राप्त होते हैं ।

5 :- बथुये और मूली का सेवन :-
तिल्ली के रोगी के लिये बथुये और मूली का सेवन बहुत ही ज्यादा अच्छा माना जाता है । तिल्ली बढ़ जाने पर बथुये और मूली के पत्तों का रस का सेवन किया जा सकता है अथवा चोकर वाले आटे में बथुये और मूली की चपातियॉ बना कर खायी जा सकती हैं ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित हैं, फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श से ही इन प्रयोगों को करने की हम आपको सलाह देते हैं ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी आपको अच्छी और लाभकारी लगी हो तो कृपया लाईक और शेयर जरूर करें । आपके एक शेयर से किसी जरूरतमंद तक सही जानकारी पहुँच सकती है और हमें भी आपके लिये और बेहतर लेख लिखने की प्रेरणा मिलती है ।

थाइरॉइड में वजन बढ़ रहा है - काली मिर्च और हल्दी है अचूक इलाज



थाइरॉइड के कारण वजन बढ़ रहा है तो काली मिर्च और हल्दी है अचूक इलाज
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थाइरॉइड की समस्या जितनी आम होती जा रही है उतना ही ज्यादा इसके समाधान के बारे में खोज की जा रही हैं । असली दिक्कत तब होती है जब थाइरॉइड के कारण रोगी का वजन अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है । इस विकट समस्या का समाधान जानिये इस पोस्ट में ।
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थाइरॉइड की समस्या में मुख्य परेशानी आती है थाय्रॉक्सिन के स्तर में कमी होना और ज्यादातर महिलाओं में यह समस्या पायी जाती है । कुछ रिसर्च में यह पाया गया है कि हल्दी में पाया जाने वाला तत्व कुरक्यूमिन और काली मिर्च में पाया जाने वाला तत्व पेपेराईन, ये दोनों मिलकर थाइरॉइड की समस्या को नियंत्रित करने में बहुत प्रभावी होते हैं । यहॉ गौर करने वाली बात यह है कि ये दोनों ही चीजे रसोईघर में बहुत आसानी से उप्लब्ध हो जाती हैं और ये दोनों ही थाइरॉइड को रेग्यूलेट करने के साथ साथ शरीर की अतिरिक्त चर्बी को जलाने में भी बहुत सटीकता से काम करती हैं । इनका प्रयोग बहुत ही आसान है । आइये जानते हैं इस प्रयोग के बारे में ।
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पहले दिन एक काली मिर्च के दाने के चूर्ण को और एक ग्राम हल्दी चूर्ण को मिलाकर सुबह सवेरे खाली पेट गुनगुने पानी के साथ सेवन करना है । उसके बाद एक घण्टे तक कुछ ना खाये । दूसरे दिन काली मिर्च के दो दाने और हल्दी के दो ग्राम चूर्ण को सेवन करना है । इस तरह सातवें दिन तक जाना है । जब सातवें दिन सात काली मिर्च और सात ग्राम हल्दी चूर्ण का सेवन हो जाये तो आठवे दिन से एक-एक काली मिर्च का दाना और एक-एक ग्राम हल्दी चूर्ण की मात्रा घटानी है ।
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जब चौहदवें दिन एक काली मिर्च का दाना और एक ग्राम हल्दी का सेवन हो तो उसके बाद दोबारा सात दिन तक एक एक काली मिर्च और एक ग्राम हल्दी चूर्ण को बढ़ाते जायें । इस तरह बढ़ते और घटते क्रम में यह प्रयोग लगातार तीन महीने तक करना है । यदि नियम से कर लिया तो बहुत अच्छे लाभ मिलने की बहुत ज्यादा उम्मीद होती है ।
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इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह हानिरहित है, फिर भी आपके आयुर्वेदिक चिकितक के परामर्श से ही इस प्रयोग को करने की हम आपको सलाह देते हैं ।
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गुर्दों को डिटॉक्स कीजिये - इस ड्रिंक के साथ



गुर्दों को डिटॉक्स कीजिये बहुत ही किफाइती तरीके से अपने घर पर ही, इस ड्रिंक के साथ
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उल्टा सीधा खान-पान और तरह तरह के हानिकारक ड्रिंक पीने से गुर्दों के ऊपर हम पूरे दिन अत्याचार करते रहते हैं, एक समय के बाद जरूरी हो जाता है कि हम गुर्दों की सफाई करें और वो भी प्राकृतिक तरीके से । इस पोस्ट में हम आपको बता रहे हैं एक ऐसा ड्रिंक जो गुर्दों को बहुत प्यार के साथ डिटॉक्स करता है । आइये जानते हैं ।

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गुर्दों को डिटॉक्स करने वाली यह ड्रिंक बनाने का तरीका बहुत सरल है इसके लिये हमको निम्न सामग्रियों की जरूरत पड़ेगी ।
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1 :- ताजा हरा धनिया 100 ग्राम
2 :- खाने का सोडा 2 चुटकी
3 :- नीम्बू आधा ताजा कटा हुआ
4 :- ताजा साफ पानी 500 मिलीलीटर

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ड्रिंक बनाने की विधी :-
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सबसे पहले धनिये की हरी पत्तियों को अच्छे से धोकर थोड़ा सा कूट लें और ताजे पानी के साथ एक स्टेनलेस स्टील के बरतन में तब तक उबालें जब तक पानी जलकर 300 मिलीलीटर रह जाये । अब इसको उतारकर ठण्डा कर लें । जब पीने लायक गरम रह जाये तो इसको छान लें और इसमें आधा नीम्बू का रस और दो चुटकी खाने का सोडा मिलाकर पी लें । यह ड्रिंक हर दस बारह दिन के बाद पी जा सकती है ।
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ध्यान दें कि यह ड्रिंक सिर्फ स्वस्थ गुर्दे को डिटॉक्स करने का काम करती है । गुर्दे की किसी बीमारी में इस ड्रिंक का सेवन अपने आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह के बाद ही करें । इस पोस्ट के माध्यम से दी गयी यह जानकारी हमारी समझ में पूरी तरह से हानिरहित है । फिर भी आपके आयुर्वेद चिकित्सक के परामर्श से ही इस ड्रिंक को सेवन करने की हम सलाह देते हैं ।
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अलसी - बूढ़े को जवान और जवान को फौलाद बनाता है

बूढ़े को जवान और जवान को फौलाद बनाता है अलसी का सेवन




अलसी के बीजों का लम्बे समय से आयुर्वेदिक दवाओं और नुस्खों में बहुतायत से प्रयोग किया जाता रहा है । इसके बीजों और बीज में से निकलने वाले तेल में इसके अधिकतर गुण छिपे रहते हैं । कहा जाता है कि अलसी एक फीलगुड फूड है क्योकि इसका सेवन करने वाले का मूड खिला खिला रहता है । आधुनिक अनुसंधानों में मालूम हुआ है कि अलसी के बीजों में ओमेगा-3 नामक फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर तत्व प्रचुर मात्रा में मिलते हैं । ओमेगा-3 फैटी एसिड के शरीर में कम होने से शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और शरीर शुगर और रक्तचाप जैसी बीमारियों का आसानी से शिकार बन जाता है । अलसी के सेवन से बुढ़ापे के लक्षण शरीर से दूर रहते हैं और जवान लोगों को शरीर में ताकत का संचार साफ महसूस होता है । खास बात यह है कि अलसी के बीजों और तेल का सेवन स्त्री और पुरुष दोनों ही कर सकते हैं । अलसी के बीजों में और क्या क्या लाभ छिपे हुये हैं ।
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अलसी का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और दिल की धड़कन सही रहती हैं, अलसी के सेवन से एक फायदा यह भी है यह रक्त को पतला बनाये रखती है ।
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रक्तवाहिनियों में जमने वाली चिकनाई भी अलसी के सेवन से साफ होती रहती है जिस कारण ब्लॉकेज की समस्या से बचाव हो जाता है ।
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कुछ रिसर्च में मालूम हुआ है कि अलसी का सएवन करने से आँखों की रोशनी भी बढ़ती है ।
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पौरुष शक्ति की कमजोरी, शीघ्रपतन और एन्द्री के तनाव में कमी की समस्या अलसी के नियमित सेवन से कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती है ।
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महिलाओं में रजो-निवृत्ति के समय होने वाले विभिन्न कष्टों और समस्याओं को अलसी के सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है ।
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बॉडी बिल्डिंग के शौकीन युवा जो माँसपेशियों को बढ़ाने के लिये विभिन्न सप्लीमेण्ट्स लेते हैं उनके लिये अलसी का सेवन एक उत्तम पूरक आहार का कार्य करता है ।
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बढ़ती उम्र के साथ साथ जोड़ों में दर्द की समस्या हो ही जाती है । अलसी के सेवन से जोड़ों के बीच की प्राकृतिक चिकनाई बनी रहती है जिस कारण से यह जोड़ों के दर्द का एक बहुत उत्तम उपचार है ।
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अलसी के बीजों को सेंक कर फोड़े आदि पर सिंकाई करने से फोड़े जल्दी पक कर फूट जाते हैं और ठीक हो जाते हैं ।
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पेट में अल्सर और कब्ज के रोगियों को अलसी के सेवन से निश्चित ही लाभ मिलता है ।
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अलसी के बीजों में मौजूद तेल नाखूनों और बालों की सेहत के लिये बहुत ही अच्छा कार्य करता है । बार बार बालों और नाखूनों के टूटने से परेशान और बेजान बालों की समस्या में अलसी के तेल का सेवन एक बार कम से कम एक महीने तक अवश्य करके देखें ।



सेवन विधी :-

अलसी के बीजों को दरदरा कूटकर 20-30 ग्राम तक की मात्रा में रोज रात को अथवा दिन में एक बार किसी भी समय सेवन करना चाहिये । अलसी के बीजों को भून कर भी खाया जा सकता है । अलसी के बीजों से निकाला गया तेल 5 मिलीलीटर की मात्रा में एक बार सेवन किया जाना चाहिये । अलसी के तेल का प्रयोग बालों, नाखूनों और त्वचा की मालिश के लिये भी किया जा सकता है । इसे अधिक मात्रा में पीस कर नहीं रखना चाहिए, क्योंकि यह खराब होने लगती है। इसलिए थोड़ा-थोड़ा ही पीस कर रखें । अलसी के सेवन के समय दिन भर में कम से कम 2 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है । 

बेर के छाल और पत्तों के गुण

बेर तो बहुत खाये होंगे, लीजिये इसकी छाल और पत्तों के गुणों की जानकारी




बेर एक बहुत ही सामान्य सा दिखने वाला फल होता है जिसका स्वाद बहुत ही अनुठा होता है ।
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1. बेर के पत्तो का रस दूध मे मितलाकर पीने से चेचक का रोग ठीक हो जाता है ।
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2.बेर के कोमल पत्तों को पीसकर, पानी मे मिलाकर घड़े में ड़ालकर मथनी से बिलोकर आये झागो को शरीर पर लेप करने से शरीर के सभी रोग दूर हो जाते है ।
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3. अतिसार रोग को ठीक करने के लिये बेर के पत्तों का चूर्ण बनाकर मट्ठे के साथ पीने से लाभ होता है ।
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4.बेर के पेड़ की छाल को पीस मुँह मॆं रखकर चूसते रहने से दबी आवाज खुल जाती है ।
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5. श्वेत प्रदर या रक्त प्रदर की परेशानी को दूर करने के लिये बेर की छाल का चूर्ण गुड़ या शहद के साथ मिलाकर खाने से इस रोग मे लाभ होता है ।
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6.बेर के पेड़ की छाल का काड़ा बनाकर कुल्ला करने से दाँत और मसूड़े मजबूत बनते है और लार भी टपकनी बंद हो जाती है ।
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7.गर्मियों में अक्सर पेशाब रुकने की समस्या हो जाती है इससे निज़ात पाने के लिये बेर के कोमल पत्तों और जीरा मिलाकर पीसकर पीने से लाभ होता है ।