गुड फ्राइडे का इतिहास - यीशू को सूली पर चढ़ाने वाले इस दिन को क्यों कहा जाता है गुड फ्राइडे (Good Friday in History)


ईसाई समुदाय (Christian Community) का महत्वपूर्ण दिन गुड फ्राइडे आज मनाया जा रहा है. यह ईस्टर संडे से ठीक पहले वाले शुक्रवार को मनाया जाता है. गुड फ्राइडे ईसाई समुदाय का प्रमुख पर्व है. इस समुदाय के लोग इस त्योहार को काले दिवस के रूप में मनाते हैं. मान्यता के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि गुड फ्राइडे के दिन ही ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था. 


प्रभु यीशु के बलिदान को याद कर रखा जाता है उपवास

इस त्योहार को अन्य नामों जैसे ब्लैक फ्राइडे, होली फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन प्रभु यीशु ने विरोध और यातनाएं सहते हुए प्राण त्यागे थे. उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया था. इस दिन ईसाई समुदाय चर्च में क्रूस की पूजा करते हैं और दुख भोग पाठ भी करते हैं. पवित्र सप्ताह के दौरान मनाए जाने वाले गुड फ्राइडे पर प्रभु यीशु के बलिदान को याद कर उपवास रखा जाता है.  


 क्या है गुड फ्राइडे का इतिहास और महत्व?
ऐसा कहा जाता है कि लगभग दो हजार साल पहले यरुशलम के गैलिली प्रांत में ईसा मसीह, लोगों को मानवता, एकता और अहिंसा का उपदेश देकर अच्छाई की राह पर चलने के लिए प्रेरित कर रहे थे. लोग उन्हें ईश्वर मानने लगे थे और उनके दिखाए रास्ते पर चल रहे थे. वे प्रेम और शांति के मसीहा माने जाते थे, लेकिन दुनिया को करुणा का संदेश देने वाले प्रभु यीशु को उस समय के धार्मिक कट्टरपंथी ने रोम के शासक से शिकायत की. यीशू के सिर पर कांटों का ताज पहनाकर उन्हें चाबुक से मारा गया और उन्हें कीलों के सहारे लटका दिया गया. हालांकि कहते हैं कि प्रभु यीशु इस घटना के तीन दिन बाद पुनः जीवित हो उठे थे.


गुड फ्राइडे मनाने का कारण
ईसाई मान्यताओं को मानने वाले लोग गुड फ्राइडे का पर्व इसलिए मनाते हैं क्योंकि आज ही के दिन प्रभु यीशु (ईसा मसीह) को सूली पर चढ़ाया गया था. इसलिए लोग इस दिन उनके बलिदान को याद करते हैं. 


कैसे मनाया जाता है गुड फ्राइडे का पर्व?
गुड फ्राइडे के दिन लोग उपवास रखते हैं और गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना करते हैं. खास बात ये है कि इस दिन गिरजाघरों में घंटा नहीं बजाया जाता है, बल्कि लकड़ी के खटखटे बजाए जाते हैं. लोग चर्च में क्रॉस को चूमकर उनका स्मरण करते हैं. इस दिन दान-धर्म के कार्य भी किए जाते हैं.उपवास के बाद मीठी रोटी बनाकर खायी जाती हैं. चूंकि इस दिन को भलाई का दिन माना जाता है, इसलिए ज्यादातर लोग सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. 


क्या है ईस्टर डे?
गुड फ्राइडे के तीसरे दिन यानी संडे को प्रभु ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए और 40 दिन तक लोगों के बीच उपदेश देते रहे. उनके दोबारा जीवित होने की घटना को ईस्टर संडे के रूप में मनाया जाता है. गुड फ्राइडे को चर्च में उनके जीवन के आखिरी पलों को दोहराया जाता है और लोगों की सेवा की जाती है. यह शोक का दिन है. इस दिन चर्च एवं घरों से सजावट की वस्तुएं हटा ली जाती हैं. लोग प्रभु यीशु की याद में काले कपड़े पहनते हैं.

वोटर ID की PDF कॉपी डाउनलोड करें (Download Voter's ID Card Online, Step by Step Process)

◆नए वोटर ID की PDF कॉपी डाउनलोड करें

◆पुराने वोटर के लिए सुविधा 1 फरवरी से होगी शुरू


वोटर ID कार्ड खोने या खराब हो जाने पर इसे दोबारा बनवाना बड़ा मुश्किल होता है। अब इलेक्शन कमीशन ने यह समस्या दूर कर दी है। आज से वोटर ID को डाउनलोड किया जा सकेगा। 31 जनवरी तक सिर्फ वे वोटर्स अपनी वोटर ID डिजिटल फॉर्मेट में ले पाएंगे, जिन्होंने पिछले साल नवंबर-दिसंबर में अप्लाई किया है। एक फरवरी से सभी वोटर्स को यह सुविधा मिलने लगेगी।

नेशनल वोटर्स डे पर इलेक्शन कमीशन ने e-EPIC स्कीम शुरू की है। EPIC यानी इलेक्टोरल फोटो आइडेेंटिटी कार्ड। इसके जरिए आप अपने वोटर ID को अपने मोबाइल में डाउनलोड कर पाएंगे। इसका प्रिंट भी लिया जा सकेगा। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार को इसकी शुरुआत की। इस दौरान पांच नए वोटर्स को ई-वोटर कार्ड दिए गए।

वोटर ID मिलने का इंतजार खत्म

यह सुविधा शुरू होने के बाद वोटर ID का इंतजार नहीं करना होगा। वोटर लिस्ट में नाम शामिल होते ही इसे डाउनलोड किया जा सकेगा। वोटर इस कार्ड को प्रिंट कर सकते हैं, इसे लैमिनेट कर सकते हैं या इसे सहूलियत के हिसाब से डिजिटली स्टोर कर सकते हैं।

डिजिटल कार्ड के फायदे

  • e-EPIC नए वोटर्स को जारी किए जा रहे प्लास्टिक वोटर कार्ड से अलग होगा। इसे डिजीलॉकर में भी अपलोड किया जा सकता है।
  • e-EPIC डाउनलोड करने से पहले KYC कराना होगा। यह सुविधा मिलने के बाद वोटर को एड्रेस चेंज होने पर बार-बार नया कार्ड बनवाने की जरूरत नहीं रहेगी। इसके लिए सिंगल e-EPIC काफी होगा। QR कोड में बदले पते के साथ इसे नए सिरे से डाउनलोड किया जा सकता है।
  • जिन वोटर्स का वोटर ID कार्ड खो गया है या खराब हो गया है, वे फ्री में डुप्लीकेट कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे। अभी इसके लिए 25 रुपए देने होते हैं।
  • इस कदम से वन नेशन - वन इलेक्शन कार्ड की योजना पर आगे बढ़ा जा सकेगा।

आप कैसे E-EPIC डाउनलोड कर सकेंगे?

  • सबसे पहले आपको e-EPIC डाउनलोड करने के लिए वोटर पोर्टल, वोटर हेल्पलाइन मोबाइल ऐप या नेशनल वोटर सर्विस पोर्टल की साइट पर जाना होगा।
  • वोटर पोर्टल की वेबसाइट http://voterportal.eci.gov.in/ और NVSP की साइट https://nvsp.in/ है। इसके अलावा आप गूगल प्ले स्टोर से वोटर मोबाइल एप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
  • अगर e-EPIC डाउनलोड करना चाहते हैं, लेकिन e-EPIC नंबर खो गया है तो आप इलेक्ट्रोरल रोल फॉर्म को http://voterportal.eci.gov.in/ या http://electoralsearch.in/ पर सर्च करें। यहां से आप अपना e-EPIC नंबर पा सकते हैं।

e-EPIC डाउनलोड करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करना होगा

  1. e-EPIC डाउनलोड करने के लिए आपको http://voterportal.eci.gov.in/ or https://nvsp.in/ या वोटर हेल्पलाइन ऐप पर जाना होगा।
  2. वोटर पोर्टल पर खुद को रजिस्टर या लॉगिन करें।
  3. इसके बाद मेन्यू पर जाकर डाउनलोड e-EPIC पर क्लिक करें।
  4. EPIC नंबर या फॉर्म रैफरेंस नंबर डालें।
  5. OTP से नंबर वैरिफाई करें।
  6. डाउनलोड EPIC पर क्लिक करें।
  7. अगर मोबाइल नंबर कार्ड पर दूसरा है, तो KYC की प्रोसेस पूरा करें।
  8. इसमें फेस लाइवनेस वैरिफिकेशन भी कर सकते हैं।
  9. KYC की मदद से नया नंबर अपडेट कर e-EPIC डाउनलोड किया जा सकेगा।

आज से वेब रेडियो, हैलो वोटर्स की भी शुरुआत
इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया के स्थापना दिवस पर 2011 से हर साल 25 जनवरी को नेशनल वोटर्स डे मनाया जाता है। आज होने वाले आयोजन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इलेक्शन कमीशन के वेब रेडियो, हैलो वोटर्स की शुरुआत की।

मानव शरीर के बारे में बत्तीस रोचक तथ्य

मानव शरीर के बारे में बत्तीस रोचक तथ्य जो जानकर आपको अचम्भा होगा


1- मानव शरीर में जीव्हा सबसे शक्तिशाली मांसपेशी (Muscle) होती है.
2- हमारी आंतों में 3 ट्रिलियन (3 लाख करोड़) बैक्टिरिया होते हैं।
3- सांयकाल की तुलना में आप प्रात:काल अधिक लंबे होते हैं।
4- आपका पेट हर तीन दिन में एक परत बनाता है, खुद को पचाने से बचाने के लिए।
5- आधे घंटे में मानव शरीर इतनी गर्मी पैदा करता है कि उससे एक गैलन पानी गर्म हो जाएगा।
6- आंख अकेला ऐसा मल्टीफोकस लेंस है जो केवल दो मिली सकेंड में एडजस्ट हो जाता है।
7- जिस हाथ से आप लिखते हैं, उस हाथ के नाखून अधिक तेजी से बढ़ते हैं।
8- एक नवजात शिशु एक मिनट में 60 बार सांस लेता है। जबकि एक किशोर 20 बार और एक युवा 16 बार।
9- मनुष्य के जांघों की हड्डियां, कंक्रीट से भी ज्यादा मजबूत होती है।
10- खाए गए भोजन को पचने में लगभग 12 घंटे लगते हैं।
11- 18 साल के बाद आपका दिमाग बढ़ना बंद कर देता है।
12- मानव खाए बिना कई हफ्ते गुजार सकता है, लेकिन सोए बिना केवल 11 दिन।
13- आदमी के शरीर में 60,000 किमी लंबीरक्त वाहिकाएं हैं।
14- एक आदमी के पूरे जीवन के दौरान 22 किलोग्राम डेड स्किन निकलती है।
15- किस करने से अधिक, हाथ मिलाते हुए जीवाणुओं का आदान-प्रदान होता है।
16- आपका दिल दिन में लगभग 1,00,000 बार धड़कता है।
17- एक भ्रूण केवल तीन महीने के अंदर अपने फिंगरप्रिंट प्राप्त कर लेता है।
18- लड़कों में लड़कियों के मुकाबले मुंहासे होने की ज्यादा संभावनाएं होती हैं।
19- मनाव भ्रूण संगीत सुनने के दौरान ज्यादा प्रतिक्रिया करता है।
20- एक स्वस्थ दिमाग 20 वाट तक बिजली पैदा कर सकता है।
21- दांतों में पाया जाने वाला अनेमल, शरीर का सबसे शक्तिशाली पदार्थ है।
22- हमारे कान 50,000 हर्ट्स तक की फ्रीक्वेंसी सुन सकते हैं।
23- फिंगरप्रिंट की तरह हर इंसान की अपनी टंगप्रिंट होती है।
24- एक दिन में किडनी आपके खून के 300 लीटर फिल्टर करती है।
25- मस्तिष्क के पॉवर सर्कल्स का सम्बन्ध हाथ पैर की उँगलियों से भी होता है।
26- मानव शरीर में 30,00,000 करोड़ लाल रक्त कणिकाएं होती हैं।
27- त्वचा में कुल 72 किलोमीटर नर्व होती है।
28- इंसान एक साल में औसतन 62,05,000 बार पलकें झपकाता है।
29- जब आप शर्माते हैं तो आपके गालों के साथ आपके पेट की परतें भी सिकुड़ जाती हैं।
30- सबकी अपनी एक यूनिक गंध होती है।
31- मानव मस्तिष्क एक मिनट में हजार शब्द पढ़ सकता है।
32- मनुष्य अपने पूरे जीवनकाल में अपनी उंगुलियां 2.5 करोड़ बार मोड़ता व सीधी करता है।

शत्रु वशीकरण मंत्र

शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग

यदि कोई शत्रु से परेशान है तो शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग उपाय को प्राप्त कर शत्रु बाधा से छुटकारा पाना चाहते है तो शत्रु वशीकरण मंत्र तंत्र का प्रयोग कर इसका समाधान प्राप्त किया जा सकता है | वशीकरण एक अनोखी और अचूक असर वाली विद्या है। इससे कई कार्य भलीभांति संपन्न किए जा सकते हैं। कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर की जा सकती हैं। मनोवांछित परिणाम के लिए लक्ष्य की प्राप्ति को संभव बनाया जा सकता है। क्योंकि इसके प्रयोग से न केवल आपके भीतर आत्मविश्वास मजबूत होगा, बल्कि व्यक्तित्व में गजब का निखार आ जाएगा।

शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग
किसी का सामना करना हो, किसी के समक्ष अपनी बात रखनी हो, किसी को अपनी बात मनवानी हो, या सामने वाले को कमजोर बनाना हो, तो इसमें वशीकरण के विविध उपायों को अपनाया जा सकता है। खासकर तब जब आप शत्रुओं से तंग आ चुके हों। वशीकरण के उपायों से ही नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के रूख को विपरीत दिशा में ले जाया जा सकता है। बड़ा से बड़ा, या कहें खरतनाक दुश्मन तक का विनाश किया जा सकता है। वशीकरण करने के कई तरीके बताए गए हैं, जिनमें कुछ मंत्रों के जाप के प्रयोग हैं, तो  कुछ के लिए धार्मिक या तांत्रिक अनुष्ठा के द्वारा सिद्धि-साधना तक की जाती है। वैसे शत्रु को टोने-टोटके से भी वशीभूत किया जा सकता है।
शत्रुनाशक मंत्र
नीचे दिए गए मंत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पहले जाप करने से शत्रु का नाश होता है या फिर शत्रुता मित्रता में बदल जाती है। यह मंत्र बार-बार परेशान करने वाले शत्रुओं को वश में करने का अच्छा और अचूक उपाय है।
मंत्रः नृसिंहाय विद्यहेवज्र नखाय धी मही तन्नो नृसहिं प्रचोदयात!!
षड्यंत्रकारी शत्रु द्वारा रचे जाने वाले छल-प्रपंच का बचाव करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय मां काली की पूजा-आराधना और साधना से भी हासिल किया जा सकाता है। इससे दुश्मन को अपने वश में  कर उसके नकारात्मक प्रभाव को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। इस उपाय के अनुसार रविवार की अमावस्या की रात में के एक काले कपड़े पर महाकाली की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसी पर पूजा के सामान को रखें और दक्षिण दिशा की ओर मुख कर पूजन आरंभ करें।  यानि कि महाकाली की तस्वीर उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।
सामान्य पूजा के बाद एक नींबू पर सिंदूर से शत्रु का नाम लिख दें। बची सिंदूर को सरसों या तिल के तेल में मिला दें और शत्रु व शत्रुता नाश का संकल्प लें। इसी के साथ काला हकिक या रुद्राक्ष या फिर मूंगे की माला से निम्न मंत्र का 11 माल जाप करें। हर माला जाप के बाद महाकाली के पास रखे निंबू पर उड़द के दाल चढ़ाएं और मन में यह भाव लाएं कि महाकाली द्वारा आपके शत्रु का विनाश हो रहा है। इस जाप का मंत्र हैः- क्रीं क्रीं शत्रु नाशिनी क्रीं क्रीं फट!!
जाप पूरे होने के बाद एक मिट्टी की छोटी मटकी में नींबू को डाल दें। महाकाली की तस्वीर को हटाकर काले कपड़े से लोटे या मटकी का मुंह बांधकर मटकी को महाकाली मानते हुए एकबार फिर शत्रु नष्ट करने के लिए प्रार्थन करें। इस तरह से संपन्न होने वाले अनुष्ठान के बाद मटकी को किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ दें। उसके बाद आप पाएंगे कि चंद समय बाद ही आपके शत्रु का आपके प्रति व्यवहार में परिवर्तन आ गया है।
भैरव अष्टमी से शत्रु नाशः शत्रु की बढ़ी हुई परेशान करने वाली हरकतों को भैरव अष्टमी से खत्म किया जा सकता हैं। भौरव मंदिर में इसे शत्रु मुक्ति के लिए किया जाता है। इसके लिए शत्रु का नाम एक छोटे से एक सफेद कागज पर भैरव मंत्र का जाप करते हुए लिखें। उसे एक शहद की शीशी में डुबोने के बाद ढक्कन बंद कर भैरव मंदिर या शनि मंदिर में गाड़ देने से न केवल शत्रु की उछल-कूद बंद हो जाती है, बल्कि उसे भी भारी क्षति होती है। इसके लिए उपयोग में आया मंत्र हैः-
ओम क्षौं क्षौं भैरवाय स्वाहा!
इस उपाय को भैरव अष्टमी के अतिरिक्त कृष्ण पक्ष द्वितीया को पड़ने वाले गुरुवार या शनिवार को किया जा सकता है।
भैरो मंत्र के उपायः शत्रु का नाश करना हो या फिर अपनी सुरक्षा पुख्ता करनी हो, उसके लिए श्री वीर भैरो मंत्र बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। यहां शत्रु नाश से मतलब किसी की शत्रुता के खात्मे से है। इसके लिए मंगलवार या शनिवार को किए जाने वाले उपाय के तहत सवा किलोग्राम बूंदी के लड्डु, नारियल, अगरबत्ती और लाल फूल की माल से श्रीवीर अर्थात हनुमान की पूजा करें। उसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का सात बार जाप का पूजा करें। इस सात मंगलवार या शनिवार को करने से लाभ मिलता है।
शत्रु वशीकरण मंत्रः हमें जो सतावेसुख न पावे सातो जनम,
ठतनी अर्ज सुन लीजेवीर भैराआज तुम।
जितने हाए शत्रु मेरेऔर जो सताए मुझे।
वाही का रक्त-पानस्वान कराओ।
मार मार खण्डन से कांत डारो माथ उनके।
कालका भवानीसिंह डारे माथ उनके।
कालका भवानीसिंह-वाहिनी की छोड़।
मैंने करी आस तेरीअब करो काज इतनो तुम। 
शत्रु वशीकरण टोटके आसान उपाय
  • कई बार शुत्रु अनावश्क तरीके से परेशान करता है। या कहें कि जानबूझ कर नीचा दिखाने और कमजोर बनाने के लिए किसी के द्वारा तंग किए जाने की स्थिति में सूर्योदय से पहले एक नींबू को चार भागों में काट लें। उसे अपने हाथ में लेकर ईष्ट देव को आराधना करते हुए गायत्री मंत्र का 11 बार जाप करें और शत्रु से मुक्ति के साथ-साथ दिनभर के सारे कार्य बाधारहित पूर्ण होने की मनोकामना करें। प्रत्येक भाग को एक-एक कर चारो दिशाओं में किसी चैराहे या खुले मैदान में फेंक दें और शांत भाव से  वापस घर आकर रोजमर्रे कामकाज में जुट जाएं।
  • शुक्ल पक्ष के किसी भी बुधवार को गोमती चक्र अपने सिर के चारो ओर घुमाकर फेंक देने से शुत्रु द्वारा किया गया नुकसान पहुंचाने वाला जादू-टोना या तंत्रिक प्रयोग खत्म हो जाता है।
  • सफलता से ईष्र्या करने वाले शत्रु के द्वारा किए गए तांत्रिक प्रभाव को खत्म करने के लिए शनिवार के दिन एक किलो काले उड़द को एक किलो कोयले या चारकोल के साथ मिलाकर एक मीटर काले कपड़े में बंधकर अपने सिर के ऊपर से हनुमान का ध्यान कर  21 बार घुमाएं। उसके बाद उसे नदी के बहते पानी में विसर्जित कर दें। ऐसा सात शनिवार करने से दुश्मन का दुष्प्रभाव हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
  • हाथ से निर्मित कागज के टुकड़े पर लाल चंदन से शत्रु का नाम लिखकर उसे शहद में तब तक डूबोए रखें, जबतक आपको ऐहसास नहीं हो जाए कि शत्रु द्वारा की जाने वाली अनावश्यक तरह से परेशानी खत्म हो गई है। इस प्रयोग से शत्रु को अपने वश में किया जा सकता है और उसे अपना पक्षधर बनाया जा सकता है।
  • शत्रु यदि कोई स्त्री है तो उसे वशीभूत कर उसकी शुत्रुता को खत्म करने के लिए छोटी इलायची, लाल चंदन, सिंदूर, कंगनी, ककड़सिंगी आदि से धूप या हवन-समाग्री बनाएं। इससे उस शत्रु जैसा वर्ताव करने वाली स्त्री के नाम से प्रतिदिन धूप जलाने से चंद दिनों में ही अच्छे परिणाम आ जाता है।
  • यदि आप चाहते हैं कि जो व्यक्ति आपसे शत्रुता का व्यावहार करता है उसके स्वाभाव में परिवर्तन आ जाए और आपसे मित्रवत अचरण बना ले तो इसके लिए बैजयंति माला धारण करना चाहिए। इस माला में किसी को भी सम्मोहित करने की अद्भुत क्षमता होती है। भगवान श्रीकृष्ण हमेश यही माल पहना करते थे।
यदि कोई शत्रु से परेशान है तो शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग उपाय/मारण मंत्र/विनाशक मंत्र/शमन मंत्र द्वारा इसका समाधान प्राप्त किया जा सकता है | यदि कोई भी प्रकार का मंत्र प्राप्त करना चाहते है और इसका प्रयोग कर शत्रु को अपने वश में करना चाहते है तो संपर्क करे और शत्रु बाधा से मुक्ति पाए |

मकर संक्रान्ति का ऐतिहासिक महत्व


इस दिन को ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उसके घर जाते हैं। चूंकि शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं, अत: इस दिन को मकर संक्रान्ति के नाम से जाना जाता है।

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है।


ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है। जैसा कि निम्न श्लोक से स्पष्ठ होता है


माघे मासे महादेव: यो दास्यति घृतकम्बलम।
स भुक्त्वा सकलान भोगान अन्ते मोक्षं प्राप्यति॥



मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है।

सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक माना गया है। मकर संक्रान्ति का प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है।

मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है और मकर संक्रान्ति के बाद सूर्य उत्तरी गोलार्ध में आ जाता है। इसी कारण यहां पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है।

अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू होने लगता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होता है।

भारत में मकर संक्रान्ति


सम्पूर्ण भारत में मकर संक्रान्ति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। विभिन्न प्रान्तों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य पर्व में नहीं।

हरियाणा और पंजाब में इसे लोहड़ी के रूप में एक दिन पूर्व १३ जनवरी को ही मनाया जाता है। इस दिन अँधेरा होते ही आग जलाकर अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति दी जाती है। इस सामग्री को तिलचौली कहा जाता है। इस अवसर पर लोग मूंगफली, तिल की बनी हुई गजक और रेवड़ियाँ आपस में बाँटकर खुशियाँ मनाते हैं। बहुएँ घर-घर जाकर लोकगीत गाकर लोहड़ी माँगती हैं। नई बहू और नवजात बच्चे के लिये लोहड़ी का विशेष महत्व होता है। इसके साथ पारम्परिक मक्के की रोटी और सरसों के साग का आनन्द भी उठाया जाता है!


उत्तर प्रदेश में यह मुख्य रूप से 'दान का पर्व' है। इलाहाबादमें गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम पर प्रत्येक वर्ष एक माह तक माघ मेला लगता है जिसे माघ मेले के नाम से जाना जाता है। १४ जनवरी से ही इलाहाबाद में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है। १४ दिसम्बर से १४ जनवरी तक का समय खर मास के नाम से जाना जाता है। एक समय था जब उत्तर भारत में है। १४ दिसम्बर से १४ जनवरी तक पूरे एक महीने किसी भी अच्छे काम को अंजाम भी नहीं दिया जाता था। मसलन शादी-ब्याह नहीं किये जाते थे परन्तु अब समय के साथ लोगबाग बदल गये हैं। परन्तु फिर भी ऐसा विश्वास है कि १४ जनवरी यानी मकर संक्रान्ति से पृथ्वी पर अच्छे दिनों की शुरुआत होती है। माघ मेले का पहला स्नान मकर संक्रान्ति से शुरू होकर शिवरात्रि के आख़िरी स्नान तक चलता है। संक्रान्ति के दिन स्नान के बाद दान देने की भी परम्परा है।बागेश्वर में बड़ा मेला होता है। वैसे गंगा-स्नान रामेश्वर, चित्रशिला व अन्य स्थानों में भी होते हैं। इस दिन गंगा स्नान करके तिल के मिष्ठान आदि को ब्राह्मणों व पूज्य व्यक्तियों को दान दिया जाता है। इस पर्व पर क्षेत्र में गंगा एवं रामगंगा घाटों पर बड़े-बड़े मेले लगते है। समूचे उत्तर प्रदेश में इस व्रत को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने का अत्यधिक महत्व होता है।

बिहार में मकर संक्रान्ति को खिचड़ी नाम से जाता हैं। इस दिन उड़द, चावल, तिल, चिवड़ा, गौ, स्वर्ण, ऊनी वस्त्र, कम्बल आदि दान करने का अपना महत्त्व है।


महाराष्ट्र में इस दिन सभी विवाहित महिलाएँ अपनी पहली संक्रान्ति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बाँटने की प्रथा भी है। लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देते हैं और देते समय बोलते हैं -"लिळ गूळ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला" अर्थात तिल गुड़ लो और मीठा-मीठा बोलो। इस दिन महिलाएँ आपस में तिल, गुड़, रोली और हल्दी बाँटती हैं।

बंगाल में इस पर्व पर स्नान के पश्चात तिल दान करने की प्रथा है। यहाँ गंगासागर में प्रति वर्ष विशाल मेला लगता है। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। मान्यता यह भी है कि इस दिन यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिये व्रत किया था। इस दिन गंगासागर में स्नान-दान के लिये लाखों लोगों की भीड़ होती है। लोग कष्ट उठाकर गंगा सागर की यात्रा करते हैं। वर्ष में केवल एक दिन मकर संक्रान्ति को यहाँ लोगों की अपार भीड़ होती है। इसीलिए कहा जाता है-"सारे तीरथ बार बार, गंगा सागर एक बार।"


तमिलनाडु में इस त्योहार को पोंगल के रूप में चार दिन तक मनाते हैं। प्रथम दिन भोगी-पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य-पोंगल, तृतीय दिन मट्टू-पोंगल अथवा केनू-पोंगल और चौथे व अन्तिम दिन कन्या-पोंगल। इस प्रकार पहले दिन कूड़ा करकट इकठ्ठा कर जलाया जाता है, दूसरे दिन लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है और तीसरे दिन पशु धन की पूजा की जाती है। पोंगल मनाने के लिये स्नान करके खुले आँगन में मिट्टी के बर्तन में खीर बनायी जाती है, जिसे पोंगल कहते हैं। इसके बाद सूर्य देव को नैवैद्य चढ़ाया जाता है। उसके बाद खीर को प्रसाद के रूप में सभी ग्रहण करते हैं। इस दिन बेटी और जमाई राजा का विशेष रूप से स्वागत किया जाता है।

असम में मकर संक्रान्ति को माघ-बिहू अथवा भोगाली-बिहूके नाम से मनाते हैं।


राजस्थान में इस पर्व पर सुहागन महिलाएँ अपनी सास को वायना देकर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। साथ ही महिलाएँ किसी भी सौभाग्यसूचक वस्तु का चौदह की संख्या में पूजन एवं संकल्प कर चौदह ब्राह्मणों को दान देती हैं।

इस प्रकार मकर संक्रान्ति के माध्यम से भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की झलक विविध रूपों में दिखती है।

लोहड़ी त्यौहार का महत्व


लोहड़ी दक्षिण एशिया के पंजाबी धर्म के लोगो द्वारा प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। यह माना जाता है कि यह सर्दियों मे उस दिन मनाया जाता है जब दिन साल का सबसे छोटा दिन और रात साल की सबसे बड़ी रात होती है।

यह एक आलाव जलाकर नृत्य और दुल्हा बत्ती के प्रशंसा गायन द्वारा किसानी त्यौहार के रूप मे मनाया जाता है। मुख्यतः यह पंजाबियों का त्यौहार है किन्तु इसे भारत के उत्तरी राज्यो में रहने वाले लोगो के द्वारा भी मनाया जाता है जैसे हरियाणा; हिमाचल प्रदेश इत्यादि।

लोहड़ी 13 जनवरी को पंजाब; दिल्ली; मुम्बई; हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के अन्य राज्यों में पूरे उत्साह के साथ मनाया जायेगा।

लोहड़ी क्यों मनायी जाती है?
पंजाबियों में लोहड़ी मनाने की बहुत सारी मान्यताए प्रचलित है; जिसमे से कुछ नीचे दी गयी है।

यह माना जाता है कि नाम लोहड़ी शब्द "लोई" (संत कबीर की पत्नी) से उत्पन्न हुआ था।

हालांकि, कुछ मानते है कि यह शब्द "लोह" (चपाती बनाने के लिए प्रयुक्त उपकरण) से उत्पन्न हुआ था।

लोहड़ी का त्योहार मनाने का एक और विश्वास है, कि लोहड़ी का जन्म होलिका की बहन के नाम पर हुआ लोग मानते है कि होलिका की बहन बच गयी थी, हालांकि होलिका खुद आग मे जल कर मर गयी।

इस त्योहार मनाने का एक और कारण है कि लोहड़ी शब्द तिलोरही (तिल का और रोरही एक संयोजन) से उत्पन्न हुआ था।

किसान नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के रूप में लोहड़ी मनाते हैं।


लोहड़ी कैसे मनाते है
अन्य त्योहार की तरह ही बहुत सारी खुशी और उळास के साथ भारत में लोगों द्वारा यह त्यौहार मनाया जाता है। यह ऐसा त्यौहार है जो, एक ही स्थान पर परिवार के सभी सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों को एक साथ लाता है। आज के दिन लोग मिलते है और एक-दूसरे को मिठाई बॉटकर आनंद लेते है। यह सबसे प्रसिद्ध फसल कटाई का त्योहार है जो किसानों के लिए बहुत महत्व रखता है। लोग इस दिन आलाव जलाते है, तब गाना गाते है और उस के चारो ओर नाचते है। वे आलाव के चारो ओर गाते और नाचते समय आग मे कुछ रेवडी, टॉफी, तिल के बीज, पॉपकॉर्न, गुड अन्य चीज़ें आग मे डालते है। यह भारत के विभिन्न प्रांतो मे अलग अलग नामो से मनाया जाता है, जैसे आंध्र प्रदेश मे भोगी, असम मे मेघ बिहू, यू0 पी0 बिहार और कर्नाटक मे मकर संक्रांति, तमिलनाडू मे पोंगल आदि। शाम को एक पूजा समारोह रखा जाता है जिसमे लोग अग्नि की पूजा करते है और आलाव के चारो ओर परिक्रमा करते है भविष्य की समृद्धि के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते है। लोग स्वादिष्ट भोजन खाने का आनंद लेते है, जैसे मक्के की रोटी, सरसो का साग, तिल, गुड, गज्जक, मूंगफली, पॉपकॉर्न आदि। सभी नाचते है गाते है और लोहडी के प्रसाद का आनंद लेते है।

इस दिन सभी सुन्दर और रंग बिरंगे कपडे पहनते है और ढोल (एक संगीत यंत्र) की थाप पर भांगड़ा(गिद्दा) करते है। लोहडी का त्योहार किसानों के लिए नए वित्तीय वर्ष के लिए एक प्रारंभिक रूप का प्रतीक है। यह भारत और विदेशो मे रहने वाले सभी पॅजाबियो द्वारा प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। लोहडी का त्यौहार नविवाहित जोडे के लिये उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि घर मे जन्मे पहले बच्चे के लिये।

इस दिन, दुल्हन सभी चीजो से सुसज्जित होती है, जैसे नई चूड़ियाँ, कपड़े, अच्छी बिंदी, मेंहदी, साड़ी, स्टाइलिश बाल अच्छी तरह नए कपड़े और रंगीन पगड़ी पहने पति के साथ तैयार होती है। इस दिन हर नई दुल्हन को उसकी ससुराल की तरफ से नए कपड़े और गहने सहित बहुत से तोहफे दिये जाते है।

दोनों परिवार (दूल्हे और दुल्हन) के सदस्यों की ओर से और अन्य मुख्य अतिथियो को इस भव्य समारोह में एक साथ आमंत्रित किया जाता है। नविवाहित जोडा एक स्थान पर बैठा दिया जाता है और परिवार के अन्य सदस्यों, पड़ोसियों, दोस्तों, रिश्तेदारों द्वारा उन्हें कुछ उपहार दिये जाते है। वे सब उनके बेहतर जीवन और उज्जवल भविष्य के लिए नये जोड़े को आशीर्वाद देते है।

नवजात शिशु की भी पहली लोहङी बहुत भव्य तरीके से मनायी जाती है। यह परिवार में पैदा हुए नए शिशु के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसर है। हर कोई बच्चे के लिए जरूरी चीजों उपहार के रूप मे देकर परिवार में एक नए बच्चे का स्वागत करते हैं। बच्चे की माँ अच्छी तरह से तैयार बच्चे को अपनी गोद में लेकर एक स्थान पर बैठती हैं। बच्चा नये कपङे, गहनो और मेन्हदी लगे हाथो मे बहुत अच्छा लगता है। बच्चा नाना-नानी और दादा-दादी दोनों की तरफ से (कपड़े, गहने, फल, मूंगफली, मिठाई, आदि सहित) बहुत सारे तोहफे पाता है।


लोहड़ी मनाने की आधुनिक परम्परा
आज कल लोहङी उत्सव का आधुनिकीकरण हो गया है। पहले लोग उपहार देने के लिए गज्जक और तिल इस्तेमाल करते थे तथापि, आधुनिक लोगों ने चॉकलेट केक और चॉकलेट गज्जक उपहार देना शुरू कर दिया है। क्योंकि वातावरण में बढ़ रहे प्रदूषण के कारण, लोग लोहङी मनाते समय पर्यावरण संरक्षण और इसकी सुरक्षा के बारे में अत्यधिक जागरूक और बहुत सचेत है। वे लोहङी पर आलाव जलाने के लिये बहुत ज्यादा पेङ काटने के बजाय इस अवसर के दौरान वृक्षारोपण करने की कोशिश करते है।



लोहड़ी मनाने का महत्व
सर्दियों की मुख्य फसल गेहूँ है जो अक्टूबर मे बोई जाती है जबकि, मार्च के अन्त मे और अप्रैल की शुरुआत मे काटी जाती है। फसल काटने और इकट्ठा करके घर लाने से पहले, किसानों को इस लोहड़ी त्योहार का आनंद मनाते हैं। यह हिन्दू कलैण्ङर के अनुसार जनवरी के मध्य मे पङता है जब सूर्य पृथ्वी से दूर होता है। सामान्यतः लोहङी का त्यौहार सर्दी खत्म होने और बसन्त के शुरु होने का सूचक है। उत्सव के दौरान लोग अपने पापो से मुक्ति के लिये गंगा में नहाते है।
हर कोई पूरे जीवन मे सुख और समृद्धि पाने के लिए इस त्योहार का जश्न मनाने है। यह सबसे शुभ दिन है जो मकर राशि में सूर्य के प्रवेश को इंगित करता है, यह 14 जनवरी से शुरू होता है और 14 जुलाई को समाप्त हो जाता है। कुछ लोग इसे एक अंत अर्थात मार्गज़्ही महीने के अंतिम दिन (चंद्र कैलेंडर के अनुसार 9 महीने) के रूप में मनाते हैं।



लोहड़ी मनाने के पीछे का इतिहास
लोहङी मनाने के पीछे बहुत पुराना इतिहास है। यह नए साल की निशानी और वसंत के मौसम के शुरू होने के साथ ही सर्दी के मौसम के अंत का प्रतीक है। लोगो की मान्यता है कि लोहड़ी की रात साल की सबसे लंबी रात होती है, तब से प्रत्येक दिन बड़ा और रातें धीरे-धीरे छोटी होना शुरू हो जाती है। यह दुल्हा बत्ती की प्रशंसा में मनाया जाता है, जो राजा अकबर के समय में एक मुस्लिम डाकू था। वह अमीर लोगों के घरो से धन चोरी करता था और गरीब लोगों को बांट देता था। वह गरीब लोगों और असहाय लोगों के नायक की तरह था, उसने विभिन्न लड़कियों के जीवन को बचाया जो अजनबियों द्वारा जबरन अपने घर से दूर ले जायी गयी थी। उसने असहाय लड़कियों की उनके विवाह में दहेज का भुगतान करके मदद की। तो, लोगो ने गरीब लोगों की गयी बहुत सारी मदद गरीब लोगों के लिए गये उसके महान कार्यों के लिए दुल्हा भट्टी की प्रशंसा मे लोहड़ी त्योहार मना रहा शुरू कर दिया।

लोहड़ी की घटना के दक्षिण से उत्तर की दिशा में सूर्य की गति को इंगित करती है, और कर्क रेखा से मकर रेखा को प्रवेश करती है। लोहड़ी त्योहार भगवान सूर्य और आग को समर्पित है। यह हर पंजाबी के लिए सबसे खुशी के मौकों में से एक है। सूर्य और आग ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत को दर्शाते है और साथ ही आध्यात्मिक शक्ति को भी जिसे लोग आशीर्वाद पाने के लिए पूजा करते है। लोग अपने देवताओ को मूंगफली, मिठाई, पॉपकॉर्न, तिल, चिरवा, रेवङी गजक, आदि के रूप में कुछ खाना-चढ़ाते है। यह दोनों धर्मों (सिखों और हिंदुओं) के लोगों द्वारा मनाया जाता है।



लोहड़ी के त्यौहार के नियम व तरीके
लोहड़ी के दिन सुबह में, घर के बच्चे बाहर जाने के लिए और कुछ पैसे और खाद्य सामग्रियों सहित जैसे तिल या तिल के बीज, गजक, मूंगफली, गुड़, मिठाई, रेवङी, आदि की मांग करते है। वे दुल्हा बत्ती की तारीफ करते हुए एक गीत भी गाते हैं, जो पंजाबी लोगों के लिए एक नायक था।

शाम को सूर्यास्त के बाद, लोग एक साथ कटी हुई फसल के खेत मे एक बहुत बङा आलाव जलाते है। लोग आलाव के चारो ओर घेरा बनाकर गीत गाते और नाचते है। वे आग मे कुछ चावल, पॉपकॉर्न या अन्य खाद्य सामग्रियों फेंकते हुये जोर से चिल्लाते है "आदर आए दलिदर जाए" अर्थात् गरीबी दूर हो और घर मे बहुत सारी समृद्धि आये। वे बहुतायत भूमि और समृद्धि के लिए अपने भगवान अग्नि और सूर्य से प्रार्थना करते हैं। पूजा समारोह के बाद वे अपने मित्रो, रिश्तेदारो, पङोसियो आदि से मिलते है और बधाई व बहुत सारी शुभकामनाओ के साथ उपहार, प्रसाद वितरित करते है। वे स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों के रात के खाना खाने का आनंद लेते है जैसे, मक्के की रोटी और सरसो का साग। वे विशेष रूप से इस दिन को मनाने के लिए एक मीठे पकवान के रूप में गन्ने के रस की खीर बनाते हैं।

वे ढोल व ड्रम की थाप पर बिशेष प्रकार का नृत्य भागडा करते है। लोहड़ी के बाद का दिन माघ महीने की शुरुआत का संकेत है जो माघी दिन कहा जाता है। इस पवित्र दिन पर लोग गंगा मे डुबकी लगाते है और गरीबो को कुछ दान देते है। वे घर में नए बच्चे के जन्म और नविवाहित जोङे के लिये एक बड़ी दावत की व्यवस्था करते है। वे ढोल और ड्रम जैसे संगीत वाद्ययंत्र की ताल पर पारंपरिक भांगड़ा गीतों पर नाचते हैं। यह एक महान पर्व है जब लोग अपने व्यस्त कार्यक्रम या जॉब से एक अल्प विराम लेकर एक दूसरे के साथ का आनन्द लेते है। यह बहुत बड़ा उत्सव है जो सभी के लिए एकता और भाईचारे की भावना लाता है। पृथ्वी पर खुश और समृद्ध जीवन देने के लिए लोग अपने सर्वशक्तिमान के लिए धन्यवाद देते है।


लोहड़ी लोक-गीत


सुंदरिए-मुंदरिए हो, तेरा कोन विचारा हो


सुंदर मुंदरिए - हो

तेरा कौन विचारा-हो

दुल्ला भट्टी वाला-हो

दुल्ले ने धी ब्याही-हो

सेर शक्कर पाई-हो

कुडी दे बोझे पाई-हो

कुड़ी दा लाल पटाका-हो

कुड़ी दा शालू पाटा-हो

शालू कौन समेटे-हो

चाचा गाली देसे-हो

चाचे चूरी कुट्टी-हो

जिमींदारां लुट्टी-हो

जिमींदारा सदाए-हो

गिन-गिन पोले लाए-हो

इक पोला घिस गया जिमींदार वोट्टी लै के नस्स गया - हो!





'पा नी माई पाथी तेरा पुत्त चढेगा हाथी हाथी

उत्ते जौं तेरे पुत्त पोत्रे नौ!

नौंवां दी कमाई तेरी झोली विच पाई

टेर नी माँ टेर नी

लाल चरखा फेर नी!

बुड्ढी साँस लैंदी है

उत्तों रात पैंदी है

अन्दर बट्टे ना खड्काओ

सान्नू दूरों ना डराओ!

चारक दाने खिल्लां दे

पाथी लैके हिल्लांगे

कोठे उत्ते मोर सान्नू

पाथी देके तोर!




कंडा कंडा नी लकडियो

कंडा सी

इस कंडे दे नाल कलीरा सी

जुग जीवे नी भाबो तेरा वीरा नी,

पा माई पा,

काले कुत्ते नू वी पा

काला कुत्ता दवे वदाइयाँ,

तेरियां जीवन मझियाँ गाईयाँ,

मझियाँ गाईयाँ दित्ता दुध,

तेरे जीवन सके पुत्त,

सक्के पुत्तां दी वदाई,

वोटी छम छम करदी आई।'




'साड़े पैरां हेठ रोड, सानूं छेती-छेती तोर!'

'साड़े पैरां हेठ दहीं असीं मिलना वी नईं!'

'साड़े पैरां हेठ परात सानूं उत्तों पै गई रात!'

कलौंजी के कुछ उत्तम गुण

कलौंजी एक कालजयी औषधि है, जानिये इसके कुछ उत्तम गुण



कलौंजी को एक बहुत विशेष गुण वाली औषधि माना गया है और आप लोग इसके बारे में बहुत कुछ सुनते और जानते रहते हैं । इस पोस्ट के माध्यम से हमारा प्रयास है कि हम कलौंजी के कुछ ऐसे गुणों से आपको परिचित करवायें जो अक्सर सभी को लाभ पहुँचाते है । आइये जानते हैं इन गुणों के बारे में इस पोस्ट के माध्यम से ।
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1. कलौंजी और जीरा को पीसकर लेप बनाकर मस्तक पर लगाने से सर्दी से होने वाले सिरदर्द मे लाभ होता है |
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2. गुर्दे और मूत्राशय की पथरी को गलाने के लिये कलौंजी को पीसकर शहद के साथ मिलाकर रोज दो बार पिया जाता है ।
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3. अनचाहे मस्सो को हटाने के लिये कलौंजी को सिरके मे मिलाकर लगाने से मस्से कट जाते है ।
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4. बवासीर के मस्सों को ठीक करने के लिये कलौंजी को जलाकर मस्सो के स्थान पर लगाने से मस्से ठीक हो जाते है ।
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5. 1 ग्राम चूर्ण कलौंजी के साथ शहद मे मिलाकर दिन मे कई बार चाटने से बुखार मे फायदा होता है ।
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6. जुकाम होने पर या नाक से पानी आने पर कलौंजी के चूर्ण मे जैतून का तेल मिलाकर नाक मे चार बूंद टपकाने से लाभ होता है ।
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7. सिर पर कलौंजी कै तेल की मालिश करने से स्मरण शक्ति मजबूत होती है ।
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